अक्षय कुमार ने स्टारडम, पैपराज़ी और उस दिन के डर पर खुलकर बात की जब शायद कैमरे और आर्क लाइट्स उनके आसपास न हों। चांदनी चौक की साधारण गलियों से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री के शीर्ष सितारों में शामिल हुए ,अक्षय कुमार का मानना है कि यह मौका हर किसी को नहीं मिलता, इसलिए वह इसे पूरी शिद्दत से जीना चाहते हैं।लगातार मीडिया की नज़र और पैपराज़ी की मौजूदगी को लेकर पूछे गए सवाल पर अक्षय कुमार ने बड़ी सहजता से कहा कि यह उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि कई बार उनकी नींद रात के साढ़े चार बजे खुलती है और जब वह बाहर निकलते हैं तो माहौल ऐसा लगता है मानो सुबह के नौ बज चुके हों।
उनके मुताबिक स्टार की जिंदगी में निजी और सार्वजनिक समय के बीच की दूरी लगभग खत्म हो जाती है। कैमरों की चमक और लोगों का ध्यान जितना आकर्षक लगता है, उतना ही यह एक अलग तरह का दबाव भी लेकर आता है। सेलेब्रिटी स्टेटस के अस्थायी होने पर बात करते हुए अक्षय कुमार ने एक बेहद ईमानदार स्वीकारोक्ति की। उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब कैमरे नहीं होंगे और आर्क लाइट्स भी नहीं जलेंगी।

