पाकिस्तान में सीजफायर को लेकर वार्ता के बीच भारत ने की बड़ी कूटनीतिक पहल

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ईरान युद्ध से प्रभावित खाड़ी के 6 अहम देशों से की अलग-अलग बातचीत
नई दिल्ली । मीडिया ईस्ट संकट के स्थायी समाधान को लेकर पाकिस्तान में अस्थायी सीजफायर से संबंधित पक्ष आगे का रास्ता तलाशने के लिए जुटे। इसी दौरान भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक पहल की है, जिसमें ईरान युद्ध से प्रभावित खाड़ी के 6 अहम देश शामिल हुए। भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देशों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत का यह संदेश सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान तक पहुंचाया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने खाड़ी के इन छह देशों को एक बार फिर यह बात दोहराई है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से पैदा होने वाली जरूरी खाने-पीने की चीजों की सप्लाई चेन में आने वाली किसी भी तरह की रुकावट के समाधान में हमारा समर्थन जारी रहेगा।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से इस संबंध में शुक्रवार को बयान जारी किया गया था, उससे स्थिति और साफ हुई कि मौजूदा संकट की स्थिति में खाड़ी देशों की चुनौतियों को लेकर भारत का स्टैंड क्या है।
गोयल ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल जासेम मोहम्मद अल बुदैवी से वर्चुअल कॉल में उम्मीद जताई कि क्षेत्र में जो युद्धविराम घोषित हुआ है, वह स्थायी होगा और स्थायी शांति एवं स्थिरता का रास्ता साफ करेगा। इस दौरान गोयल ने वर्चुअल माध्यम से ही जीसीसी के यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे सदस्यों से अलग से भी बात की। भारत के लिए खाड़ी देशों के इस ग्रुप के साथ इस तरह की एकजुटता दिखाना इस वजह से बहुत ही अहम है, क्योंकि यह ब्लॉक भारत का सबसे बड़ा तेल और गैस सप्लायर है। इसके अलावा खाड़ी देशों के इस ग्रुप के साथ भारत की फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बातचीत चल रही है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल से पीयूष गोयल की चर्चा से पहले पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कतर की यात्रा पर गए।
रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शनिवार से संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर हैं। पश्चिम एशिया संकट की वजह से खाड़ी देश हों या फिर भारत, सबसे बड़ी दिक्कत होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हो रही है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को जिस तरह से नियंत्रण में कर लिया है, उससे अगर भारत के सामने तेल और गैस का संकट खड़ा हुआ है तो खाड़ी देशों का निर्यात भी बंद हुआ है और उन तक पहुंचने वाले खाने-पीने की चीजों की सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है। ऐसे में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में ओमान की सदस्यता का इस समय अलग मायने है। ऐसे में ओमान को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के अन्य खाड़ी मुल्क सदस्यों के साथ एक टेबल पर लाना भारत की बड़ी कूटनीतिक पहल साबित हो सकती है।