:: टायर, पाइप और लोहे के स्क्रैप से निखरीं उद्यानों की कलाकृतियां; महापौर और आयुक्त के मार्गदर्शन में बने पार्क बन रहे पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र ::
इंदौर। स्वच्छता के क्षेत्र में देश का सिरमौर इंदौर अब कबाड़ प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के मामले में भी देश के सामने एक नया और प्रेरणादायी उदाहरण पेश कर रहा है। इंदौर नगर निगम द्वारा 4-आर सिद्धांत यानी रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल और रिकवर को बढ़ावा देते हुए शहर के विभिन्न उद्यानों में बेहद आकर्षक “वेस्ट टू वंडर” पार्क विकसित किए गए हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव एवं आयुक्त क्षितिज सिंघल के मार्गदर्शन में अनुपयोगी सामग्री को नया जीवन दिया गया है। शहर के कबाड़ में पड़े पुराने टायर, लोहे के स्क्रैप, जंग खाए पाइप और कंडम हो चुकी मशीनों के हिस्सों से ऐसी जीवंत कलाकृतियां तैयार की गई हैं जिन्हें देखकर हर कोई दंग है।
महापौर और आयुक्त की इस दूरदर्शी सोच के चलते शहर के नाना-नानी गार्डन, ग्लोबल गार्डन, यूरेशिया पब्लिक पार्क, केशव वाटिका और विश्राम बाग जैसे प्रमुख उद्यानों की सूरत पूरी तरह बदल गई है। इन स्थलों पर स्थापित कबाड़ से बनी सुंदर संरचनाएं अब इंदौर के नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी मुख्य आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। यह अनूठा प्रयोग न केवल शहर की सुंदरता में चार चांद लगा रहा है, बल्कि आम जनता को पर्यावरण संरक्षण और सीमित संसाधनों के रचनात्मक पुनः उपयोग का एक बड़ा संदेश भी दे रहा है।
नगर निगम की इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य नागरिकों को रोजमर्रा के जीवन में 4-आर सिद्धांत अपनाने के लिए प्रेरित करना है। निगम प्रशासन का मानना है कि इस तरह के पार्कों को देखकर लोगों में यह विश्वास जगेगा कि रचनात्मक सोच और नवाचार के माध्यम से बेकार पड़ी चीजों को भी उपयोगी एवं सुंदर बनाया जा सकता है। इससे न केवल घरेलू कचरे में कमी आएगी, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को भी जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर स्वच्छता, नवाचार और जनभागीदारी का यह अनूठा मॉडल इंदौर को एक बार फिर देशभर में अग्रणी साबित कर रहा है।


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