भगवान को 56 भोग नहीं, हमारा शुद्ध और सात्विक मन चाहिए; गीता भवन में शिव-पार्वती विवाह की धूम

धार्मिक

:: आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के श्रीमुख से बह रही भक्ति की रसधारा; भजनों पर झूमे श्रद्धालु, आज मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव ::
इंदौर । भक्ति के कई स्वरूप होते हैं, लेकिन इनमें निष्काम भक्ति को ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भक्ति के मार्ग में पाखंड और प्रदर्शन ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकते। मानव जीवन की धन्यता केवल नि:स्वार्थ सेवा और सत्कर्मों से ही संभव है। भगवान को छप्पन भोग नहीं, बल्कि हमारा शुद्ध और सात्विक मन चाहिए। प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण के सच्चे भाव के बिना वास्तविक भक्ति संभव ही नहीं है।
यह प्रेरक विचार श्रीधाम वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने व्यक्त किए। वे मंगलवार शाम को गीता भवन के सत्संग सभागृह में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन शिव-पार्वती विवाह प्रसंग की व्याख्या कर रहे थे। पुरुषोत्तम मास के पवित्र संयोग पर यह कथा मातुश्री कमलादेवी-बाबूलाल मंगल की पुण्य स्मृति में आयोजित की जा रही है। स्वामीजी ने कहा कि शिव और पार्वती इस सृष्टि के नियामक हैं और भगवान की प्रत्येक लीला में संपूर्ण चराचर जगत के कल्याण का भाव छिपा होता है।
:: शिव-पार्वती विवाह पर झूमा पंडाल, आज प्रकट होंगे कान्हा ::
कथा के दौरान जब शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग आया, तो समूचा सभागृह शंखध्वनि और जयकारों से गूंज उठा। साध्वी कृष्णानंद द्वारा प्रस्तुत किए गए मधुर और कर्णप्रिय भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। कथा श्रवण के लिए गीता भवन में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। प्रमुख संयोजक संजय मंगल ने बताया कि भागवत महापुराण के चतुर्थ दिवस यानी बुधवार 27 मई को कथा स्थल पर भव्य श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा, जिसे लेकर भक्तों में खासा उत्साह है। इसके बाद 28 मई को गोवर्धन पूजा व छप्पन भोग, 29 मई को रुक्मणी विवाह और 30 मई को सुदामा चरित्र के साथ फूलों की होली खेली जाएगी।
:: संस्कारों को संवारती है कथा, बाल्यकाल से ही जरूरी है भक्ति ::
विद्वान वक्ता स्वामी भास्करानंद ने कथा की महत्ता बताते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास में भागवत श्रवण का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। कान और आंख के माध्यम से हृदय में प्रवेश करने वाली यह कथा हमारे विचारों और संस्कारों को संवारकर हमें मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाती है। शिव-पार्वती का चरित्र जीवन की दशा और दिशा बदलने में सक्षम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि मनुष्य को बाल्यकाल से ही भक्ति के संस्कार मिल जाएं, तो उसकी वृद्धावस्था अपने आप संवर जाती है।
कथा के शुभारंभ पर मुख्य संयोजक संजय-किरण मंगल, बिनोद-सुनीता अग्रवाल, अवनि-अनंत अग्रवाल, मोतीलाल लश्कर, हर्ष फिरोदिया और संजीव सचदेवा सहित अन्य यजमानों ने व्यासपीठ का विधि-विधान से पूजन कर आरती उतारी। अतिथियों की अगवानी गोविंद मंगल, गोपाल मंगल, राजेश गर्ग और शिव जिंदल ने की। यह संगीमय कथा 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक आयोजित की जाएगी।