जंग में जान गंवा चुके मासूमों के फोटो, बैग और जूते विमान में रखकर इस्लामाबाद पहुंचा ईरानी डेलिगेशन

अंतरराष्ट्रीय

इस्लामाबाद । अमेरिकी हमलों में ईरान के सैकड़ों स्कूली बच्चे मारे गए है। तकलीफ तब और बढ़ गई जब ईरान की संसद के स्पीकर बागेर कालिबाफ अपने विमान की प्रत्येक सीट पर जान गंवाने वाले मासूमों की तस्वीर, जूते, और स्कूली बैग रखकर शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे। ईरान का यह कदम पूरी दुनिया को युद्ध की विभीषिका और नागरिक हताहतों का सच दिखाने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है। स्पीकर कालिबाफ ने अपनी पोस्ट में हैशटैग मिनाब 168 का इस्तेमाल किया है, जो एक बड़ी त्रासदी की ओर इशारा करता है। दरअसल, यह उन 170 से अधिक लोगों की याद में है, जो ईरान के मिनाब शहर के शजरह तैय्यबेह प्राथमिक विद्यालय पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए थे। उस हमले के वक्त बच्चे अपनी कक्षाओं में पढ़ रहे थे। विमान में रखे गए ये बैग और जूते उन्हीं बच्चों के हैं जो अब इस दुनिया में नहीं रहे।
बागेर कालिबाफ जिस विमान से पाकिस्तान पहुंचे हैं, उसे एक उड़ते हुए स्मारक का रूप दिया गया है। कालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विमान के भीतर की एक अत्यंत भावुक कर देने वाली तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में विमान की हर सीट के पीछे उन मासूम बच्चों की तस्वीरें चिपकाई गई हैं, जिन्होंने हालिया अमेरिकी-इजरायली हमलों में अपनी जान गंवाई है। इतना ही नहीं, हर सीट पर स्कूली बैग और छोटे जूते भी रखे गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की दिशा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पूरी तरह तैयार है, जहां ईरानी प्रतिनिधिमंडल का आगमन हो चुका है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के लिए ईरान की संसद के स्पीकर बागेर कालिबाफ अपनी विशेष टीम के साथ शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचे, जहां पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने खुद उनका स्वागत किया। इस्लामाबाद में होने वाली इस वार्ता की मेज पर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मकसद सिर्फ राजनीतिक संवाद नहीं, बल्कि उन मासूमों के लिए न्याय की मांग करना भी है जिन्हें युद्ध की आग में झोंक दिया गया। ईरानी पक्ष का स्टैंड साफ है कि वे शांति के पक्षधर हैं, लेकिन मासूम बच्चों के खून की कीमत पर कोई समझौता नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में होने वाली यह बातचीत किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाती है या नहीं।