जब संवेदनशील हुआ सिस्टम: बेसहारा वृद्धा की हालत देख खुद मदद को पहुंचे निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार

मध्य प्रदेश

निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार की संवेदनशीलता से बेसहारा मां को मिला सहारा
जबलपुर l वैसे तो नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार अपनी सख्त कार्यप्रणाली, फील्ड में लगातार सक्रियता और प्रशासनिक पकड़ के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन इसके साथ ही उनका एक संवेदनशील और मानवीय चेहरा भी लगातार सामने आता रहा है। खासकर बुजुर्गों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता केवल जनसुनवाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आम निरीक्षण के दौरान भी जब कभी कोई मजबूर व्यक्ति उनकी नजर में आता है, तो वे उसकी मदद के लिए तत्काल पहल करते दिखाई देते हैं।
ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य गुरुवार को देखने मिला, जब नगर निगम आयुक्त शहर की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने टीमरभीटा स्थित रानी लक्ष्मीबाई वार्ड क्रमांक 66 पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उनकी नजर 85 वर्षीय बेसहारा वृद्धा श्रीमती चेती बाई पर पड़ी। वृद्ध महिला की स्थिति देखकर उन्होंने तुरंत गाड़ी रुकवाई और स्वयं उनके पास पहुंचे। बातचीत में पता चला कि वह पूरी तरह निराश्रित हैं और उनका बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं है।
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए निगमायुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को वृद्ध महिला की सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान मौजूद लोगों ने भी निगम आयुक्त के इस व्यवहार की सराहना की।
यह पहला मौका नहीं है जब रामप्रकाश अहिरवार ने किसी जरूरतमंद की जिंदगी में राहत पहुंचाने की पहल की हो। इससे पहले भी उन्होंने ‘बाई के बगीचे’ क्षेत्र में रहने वाली निराश्रित कला बाई राजपूत को आशियाना दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्षों पहले मकान गिर जाने के बाद कला बाई भिक्षावृत्ति कर जीवनयापन करने को मजबूर थीं, लेकिन नगर निगम के प्रयासों से उन्हें वृद्धाश्रम में सुरक्षित ठिकाना और सम्मानजनक जीवन मिल सका।
जनसुनवाई के दौरान भी अक्सर यह देखा जाता है कि निगमायुक्त बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक अपने पास बैठाकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान के लिए तत्काल अधिकारियों को निर्देश देते हैं। कुछ दिनों पहले एक बीमार वार्ड सुपरवाइजर की जानकारी मिलने पर वे अचानक उसके घर भी पहुंच गए थे, जिसने निगम कर्मचारियों के बीच सकारात्मक संदेश दिया।
रामप्रकाश अहिरवार का यह व्यवहार यह संदेश देता है कि एक अधिकारी का दायित्व केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक संवेदनशीलता, सम्मान और उसका अधिकार पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।