नई दिल्ली । बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में निजी विमान रखने की शुरुआत करीब 115 साल पहले हो चुकी थी। इस शाही परंपरा की नींव पटियाला रियासत के महाराजा भूपेंद्र सिंह ने रखी थी, जिन्हें अपने समय का सबसे अमीर और आधुनिक सोच वाला राजा माना जाता था। महाराजा भूपेंद्र सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1891 को हुआ था। उन्होंने मात्र नौ साल की उम्र में पटियाला रियासत की गद्दी संभाल ली थी। उस दौर में दुनिया में विमानन तकनीक शुरुआती चरण में थी और हवाई जहाज लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं थे। ऐसे समय में साल 1910 में महाराजा भूपेंद्र सिंह ने फ्रांस से अपने लिए निजी विमान मंगवाए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने प्रसिद्ध मोती बाग महल के बाहर एक निजी हवाई पट्टी और रनवे भी बनवाया था। इसे भारत का पहला निजी एयरफील्ड माना जाता है।
महाराजा जब चाहते, अपने विमानों से उड़ान भरते थे। उनके इस कदम को आज के प्राइवेट जेट कल्चर की शुरुआती कड़ी माना जाता है। महाराजा भूपेंद्र सिंह अपनी बेशुमार दौलत और शाही ठाठ-बाट के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थे। उनकी शान का सबसे बड़ा प्रतीक ‘पटियाला नेकलेस’ माना जाता है। साल 1925 में उन्होंने पेरिस की मशहूर ज्वेलरी कंपनी कार्टियर को दुनिया का सबसे शानदार हार बनाने का आदेश दिया था। तीन वर्षों की मेहनत के बाद 1928 में तैयार हुए इस हार में करीब 2,930 हीरे जड़े गए थे। इसका सबसे खास आकर्षण 234.6 कैरेट का ‘डी बीयर्स’ हीरा था, जिसे दुनिया के सबसे बड़े हीरों में गिना जाता है। इस हार की अनुमानित कीमत आज करीब 248 करोड़ रुपये बताई जाती है।
हालांकि साल 1948 में यह ऐतिहासिक हार रहस्यमय तरीके से गायब हो गया था, जिसकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ सकी है। महाराजा को लग्जरी कारों का भी बेहद शौक था। कहा जाता है कि उनके पास 27 रॉल्स रॉयस कारों का काफिला था। इनमें कई कारें विशेष रूप से उनके आदेश पर तैयार कराई गई थीं। उनके खान-पान और रहन-सहन की कहानियां भी काफी चर्चित थीं। भोजन सोने और चांदी के बर्तनों में परोसा जाता था और शाही रसोई में दुनिया के बेहतरीन रसोइए काम करते थे। खेलों के प्रति भी उनका गहरा लगाव था। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और हिमाचल प्रदेश के चायल में दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान बनवाया। महाराजा भूपेंद्र सिंह शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने कई स्कूलों और अस्पतालों की स्थापना करवाई।

