एक विश्वसनीय पहचान दस्तावेज माना जाता रहा है पास्पोर्ट

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-नागरिकता का प्रमाण पासपोर्ट विवाद पर बोले शशि थरूर
नई दिल्ली । पासपोर्ट को भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जाने को लेकर चल रही बहस के बीच कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वर्षों से पासपोर्ट को एक विश्वसनीय पहचान दस्तावेज माना जाता रहा है और यदि इसे नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता, तो इस विषय पर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।
थरूर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि भारतीय नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करने को लेकर बार-बार पैदा होने वाले विवादों का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने से पहले व्यापक दस्तावेजी जांच और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में आम लोगों के लिए यह समझना कठिन है कि इतनी विस्तृत जांच के बाद जारी किया गया दस्तावेज नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि दशकों से पासपोर्ट को पहचान और वैध दस्तावेज के रूप में देखा जाता रहा है। यदि यह नागरिकता साबित नहीं करता, तो फिर नागरिकता के प्रमाण के रूप में किस दस्तावेज को माना जाएगा, इस पर स्पष्टता आवश्यक है।
कानूनी स्थिति का भी किया उल्लेख
थरूर ने कहा कि 1967 के पासपोर्ट अधिनियम की धारा 20 के तहत सरकार का यह लंबे समय से कानूनी दृष्टिकोण रहा है कि कुछ विशेष परिस्थितियों और जनहित में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने माना कि यह एक तकनीकी और कानूनी पहलू है, लेकिन आम नागरिकों के लिए इस अंतर को समझना आसान नहीं है।
आधार और पासपोर्ट पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड अपने आप में नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह पहचान और निवास का दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि इससे ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जहां लोगों के पास आधुनिक बायोमेट्रिक दस्तावेज तो हैं, लेकिन नागरिकता के अंतिम प्रमाण को लेकर भ्रम बना रहता है।