घुसपैठ नहीं: अरुणाचल में चीनी अतिक्रमण से रिजिजू का साफ इनकार

ताज़ा खबर देश

नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना द्वारा किसी भी तरह की घुसपैठ के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारतीय सीमा के भीतर चीनी अतिक्रमण की कोई घटना नहीं हुई है। रिजिजू ने बताया कि भारत-चीन सीमा का अभी तक पूरी तरह से सीमांकन नहीं हुआ है, यही कारण है कि दोनों देशों के सैनिकों की ओर से समय-समय पर ट्रांसग्रेशन की घटनाएं होती रहती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ट्रांसग्रेशन का मतलब यह नहीं है कि यह घुसपैठ है, बल्कि यह सीमा की अलग-अलग धारणाओं के कारण सेनाओं का कुछ दूरी तक आगे बढ़ जाना होता है। भारतीय सेना ने भी हाल ही में आई ऐसी मीडिया रिपोर्टों को तथ्यहीन और पूरी तरह निराधार बताते हुए उनका खंडन किया है, जिससे इस दावे को और बल मिलता है।
किरेन रिजिजू ने दृढ़तापूर्वक कहा कि भारत की ओर कोई चीनी घुसपैठ नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि घुसपैठ न होने का मुख्य कारण सीमा का स्पष्ट सीमांकन न होना है, जिसकी वजह से दोनों पक्षों के सैनिक अपनी-अपनी वास्तविक नियंत्रण रेखा की धारणा के अनुसार कभी-कभी आगे बढ़ जाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक समस्या सीमा की भिन्न-भिन्न व्याख्याएं हैं, जिसके कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। दरअसल, यह विवाद उस समय सामने आया जब अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के एक सीमावर्ती जनजातीय संगठन ने गंभीर आरोप लगाए। इस संगठन ने दावा किया था कि पिछले छह वर्षों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने उनके पारंपरिक चरागाह, शिकार और खेती की जमीन के कुछ हिस्सों पर धीरे-धीरे कब्जा कर लिया है। संगठन ने इन दावों की सरकारी स्तर पर जांच कराने की मांग भी की थी, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा में आया।
इन आरोपों के तुरंत बाद भारतीय सेना ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया। सेना ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में अरुणाचल प्रदेश में हाल में चीनी सेना की घुसपैठ और कैंप स्थापित किए जाने की जो बातें कही गई हैं, वे पूरी तरह गलत और निराधार हैं। सेना ने स्पष्ट किया कि सीमा की स्थिति पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है और जनता को किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचना चाहिए। रिजिजू ने एक बार फिर ट्रांसग्रेशन और घुसपैठ के बीच के स्पष्ट अंतर को दोहराया। उन्होंने बताया कि भारत और चीन के बीच सीमा का अंतिम सीमांकन नहीं हुआ है, इसलिए दोनों देशों की वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर अपनी-अपनी अलग-अलग धारणाएं हैं। इसी वजह से कभी-कभी दोनों ओर के सैनिक अपनी-अपनी समझ के अनुसार आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन इसे स्थायी कब्जा या घुसपैठ नहीं माना जा सकता।