-एनओएए ने 3 जुलाई के लिए जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म की चेतावनी जारी की
-रेडियो संचार और उपग्रह सेवाओं पर पड़ सकता है असर
वॉशिंगटन । सूर्य पर हुए एक शक्तिशाली विस्फोट के बाद वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की ओर बढ़ रहे सौर तूफान को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने 3 जुलाई (भारतीय समयानुसार 4 जुलाई) को संभावित जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म की चेतावनी जारी की है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, 30 जून को सूर्य के सक्रिय क्षेत्र रीजन 4479 से एक्स1.1 श्रेणी का शक्तिशाली सोलर फ्लेयर (सौर ज्वाला) निकला। इसके साथ ही कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) भी हुआ, जिसमें अत्यधिक विद्युत आवेशित कणों का विशाल बादल अंतरिक्ष में उत्सर्जित हुआ। चूंकि यह सक्रिय क्षेत्र पृथ्वी की दिशा में था, इसलिए इसके कुछ हिस्से के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने की संभावना जताई गई है। सोलर फ्लेयर से निकली एक्स-रे तरंगें आठ मिनट से कुछ अधिक समय में पृथ्वी तक पहुंच गईं, जिससे उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में दिन के समय हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। रेडियो संचार सेवाओं का उपयोग करने वाले लोगों को सिग्नल में रुकावट और व्यवधान का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोरोनल मास इजेक्शन का प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर पड़ता है, तो जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म उत्पन्न हो सकता है। इसका असर उपग्रह संचार, जीपीएस सेवाओं, विद्युत ग्रिड और रेडियो संचार प्रणालियों पर पड़ सकता है। हालांकि, वर्तमान अनुमान के अनुसार सीएमई का अधिकांश हिस्सा पृथ्वी के उत्तर से गुजर सकता है, जिससे व्यापक नुकसान की संभावना कम मानी जा रही है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस सौर गतिविधि का एक सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। यदि पर्याप्त मात्रा में आवेशित कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो उत्तरी अमेरिका और उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों में आकर्षक नॉर्दर्न लाइट्स (ऑरोरा) दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, इसकी तीव्रता और दृश्यता सौर तूफान की वास्तविक दिशा और ताकत पर निर्भर करेगी। स्पेस वेदर विशेषज्ञ स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और अगले कुछ दिनों में सौर गतिविधियों के आधार पर नए अपडेट जारी किए जा सकते हैं।

