भारत के परिवर्तनकारी दशक ने बदली सोच और दुनिया का नजरिया: राजनाथ सिंह

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मेक इन इंडिया पर कभी विपक्ष ने सवाल उठाए
नई दिल्ली । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत ने एक अभूतपूर्व परिवर्तनकारी काल का अनुभव किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सोच में आए बदलाव को रेखांकित किया, इसके परिणामस्वरूप विश्व ने भी भारत को देखने का अपना नजरिया बदल दिया है। केंद्रीय मंत्री सिंह के अनुसार, अब यह सवाल नहीं पूछा जाता कि क्या भारत यह कर सकता है? बल्कि अब पूछा जाता है कि भारत कब तक यह कर लेगा? यह आत्मविश्वास देश की बदलती तस्वीर का दिखाता है।
केंद्रीय मंत्री सिंह ने भारत की इस नई कार्य संस्कृति के कई उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि कैसे 2021 में भारत सेमीकंडक्टर मिशन शुरू करते समय बड़े विशेषज्ञों ने संदेह जाहिर किया था, लेकिन संकल्प और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण पिछले साल मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर चिप बनाने में सफलता मिली। मेक इन इंडिया पहल, जिस पर कभी विपक्ष ने कई सवाल उठाए थे, आज सफलता के नए आयाम गढ़ रही है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का मूल्य 18,000 करोड़ से बढ़कर 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि मोबाइल निर्यात करीब 163 गुना बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऑटोमोबाइल निर्यात भी 2014 के 50,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 1.2 लाख करोड़ रुपये सालाना हुआ है, जिसमें भारत सौ से अधिक देशों को इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात कर रहा है। देश ने स्वदेशी हाई हॉर्सपावर लोकोमोटिव बनाने और उस ब्रॉड-गेज ट्रैक पर सफलतापूर्वक संचालित करने का विश्व कीर्तिमान भी स्थापित किया है।
इतना ही नहीं बीते 12 साल में देश ने रक्षा क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। साल 2026 में देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, और ऑपरेशन सिंदूर जैसी पहलों ने मेड इन इंडिया डिफेंस प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा मजबूत किया है। डिफेंस एक्सपोर्ट भी रिकॉर्ड 38 हजार करोड़ रुपये को पार कर चुका है। आर्टिकल-370 हटाने, मेड इन इंडिया 5जी और यूपीआई जैसी अन्य उपलब्धियों का जिक्र कर राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल भौतिक प्रगति नहीं, बल्कि भारत की सोच में आया बदलाव है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में काम करने की संस्कृति को भी बदल दिया है, जहां अब परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन एक ही सरकार के कार्यकाल में होता है। अंत में, उन्होंने विकास के साथ-साथ भारत की सभ्यता, संस्कृति और विरासत को महत्व देने पर जोर दिया, क्योंकि यह हमारी पहचान, एकता और राष्ट्रीय चेतना का आधार है।