भारत-नेपाल बॉर्डर पर नहीं चलती बालेन शाह की सरकार

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जनता ने रिकॉर्ड तोड़ खरीदी से सरकार के होश उड़ाए
काठमांडू । जब कोई सरकार अपनी जनता पर अत्यधिक नियम थोपती है, तो जनता अक्सर इसका प्रभावी इलाज ढूंढ लेती है। नेपाल में इसका एक अद्भुत उदाहरण देखने को मिला, जहाँ भारत-नेपाल सीमा पर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार का कड़ा कस्टम ड्यूटी का नियम भी बेअसर साबित हुआ। नेपाल सरकार ने यह सोचा था कि सीमा शुल्क के डर से वह अपने नागरिकों को भारत जाकर खरीदारी करने से रोक पाएगी, लेकिन जनता ने इस पाबंदी की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई हैं कि नए आंकड़ों ने बड़े-बड़े अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। नेपाल के नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (एनएसओ) के नवीनतम सर्वेक्षण ने एक ऐसा सच उजागर किया है, जिसने सीमा पर प्रतिबंध लगाने वालों के होश उड़ा दिए हैं।
एनएसओ के सर्वेक्षण से पता चला है कि नेपाल से बाहर जाने वाले पर्यटन का मुख्य कारण सीमा-पार खरीदारी है, खासकर नेपाल-भारत सीमा के पास। यह अध्ययन 16 अक्टूबर 2024 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच किया गया, जिसमें नेपाली लोगों की विदेश यात्राओं का विश्लेषण किया गया। इस अवधि में, नेपाली लोगों ने विदेशों की 41 लाख से अधिक यात्राएं कीं, जिनमें से 35 लाख एक ही दिन में जाकर लौट आने वाली यात्राएं थीं, जबकि 6.22 लाख यात्राएं ऐसी थीं, जिनमें कम से कम एक रात बाहर बिताई गई। डोमेस्टिक टूरिज्म सर्वे 2025 रिपोर्ट के अनुसार, एक ही दिन में होने वाली विदेश यात्राओं का सबसे बड़ा कारण खरीदारी था, जिसमें लगभग 63.9 प्रतिशत लोग केवल खरीदारी के उद्देश्य से गए थे। यह स्पष्ट करता है कि खासकर नेपाल-भारत सीमा पर होने वाली खरीदारी लोगों के विदेश जाने की सबसे प्रमुख वजह बन गई है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार ने जब यह नियम लागू करने की कोशिश की थी कि भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक कीमत का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी देनी होगी, तो सीमा क्षेत्रों के लोगों और भारतीय व्यापारियों ने इसका कड़ा विरोध किया। बाद में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से सरकार का यह फैसला फिलहाल रोक दिया गया। सर्वेक्षण के मुताबिक, नेपाली लोगों की एक ही दिन में होने वाली विदेश यात्राओं में सबसे ज्यादा यात्राएं भारत की थीं, जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक और सामाजिक रिश्तों के साथ-साथ सीमा पार आवाजाही की आसान व्यवस्था को भी उजागर करती हैं। नेपाल के सातों प्रांतों में से मधेश प्रांत से सबसे अधिक एक-दिवसीय विदेश यात्राएं दर्ज की गईं, जबकि लुंबिनी प्रांत से सबसे ज्यादा रात रुककर की जाने वाली विदेश यात्राएं हुईं। ये दोनों ही प्रांत भारत की सीमा से सटे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रांतों से भारत आना-जाना आसान होने के कारण लोग खरीदारी, व्यापार, धार्मिक गतिविधियों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं। सर्वेक्षण में बताया गया कि एक ही दिन की विदेश यात्राओं पर होने वाले कुल खर्च का 70.7 प्रतिशत हिस्सा केवल खरीदारी पर खर्च हुआ, जिसमें मधेश और लुंबिनी प्रांतों में खरीदारी पर खर्च का हिस्सा सबसे अधिक रहा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रात रुककर की जाने वाली विदेश यात्राओं की सबसे बड़ी वजह दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना (40.3 प्रतिशत) रही, जिसके बाद इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं (19.6 प्रतिशत) तथा धार्मिक कारणों (19.6 प्रतिशत) से की गई यात्राएं थीं। नेपाली लोगों की विदेश यात्राएं नवंबर से जनवरी के बीच सबसे अधिक होती हैं, जो त्योहारों के मौसम और यात्रा के लिए अनुकूल समय को दर्शाता है।