ताजमहल मंदिर या मकबरा? हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

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प्रयागराज । आगरा के प्रतिष्ठित ताजमहल को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस कि यह एक मकबरा है या एक मंदिर, एक बार फिर न्यायिक परीक्षण के घेरे में आ गई है। यह दावा कि ताजमहल वास्तव में तेजो महालय नामक एक प्राचीन शिव मंदिर है, कई वर्षों से विभिन्न हलकों में उठाया जाता रहा है। इन्हीं सवालों के बीच, ताजमहल परिसर का सर्वे कराने की मांग वाली एक याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गई थी। सोमवार को हाई कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी किए हैं। हाई कोर्ट ने इन दोनों संस्थाओं से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या ताजमहल वास्तव में तेजो महालय मंदिर था।
यह पूरा मामला 2015 में शुरू हुआ था जब ताजमहल को लेकर एक मुकदमा आगरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में दर्ज किया गया था। यह मामला अभी भी लंबित है और इसमें यह घोषित करने की मांग की गई है कि ताजमहल परिसर में अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय का मंदिर मौजूद है। इस लंबे समय से लंबित मामले में याचिकाकर्ताओं ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की अर्जी लगाई थी, ताकि परिसर का सर्वेक्षण और फोटोग्राफी की जा सके। हालांकि, जिला अदालत ने इस अर्जी को नामंजूर कर दिया था। अब जिला अदालत के इसी फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। यह ताजा याचिका 3 जुलाई को अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर, वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन और पांच अन्य व्यक्तियों की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि हाई कोर्ट यह घोषणा करे कि ताजमहल परिसर के अंदर अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर मौजूद है। इसके साथ ही, याचिका में हाई कोर्ट से ताजमहल परिसर का व्यापक सर्वेक्षण कराने की भी अपील की गई है।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकील हरि शंकर जैन ने कोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा कि विवादित परिसर की फोटोग्राफी कराने और एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के लिए निचली अदालत में आवेदन किया गया था। जैन ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने उनके इस आवेदन को गलत तरीके से खारिज कर दिया, और इसके बाद उनकी पुनर्विचार याचिका को भी सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया गया। हरि शंकर जैन ने अदालत से आग्रह किया कि इस पूरे विवाद का सही और न्यायपूर्ण निपटारा करने के लिए ताजमहल परिसर का सर्वेक्षण और फोटोग्राफी कराना अत्यंत आवश्यक है। उनकी दलीलों को सुनने के बाद, जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने केंद्र सरकार और एएसआई को अपने काउंटर-एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद अब केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अदालत के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी और इस ऐतिहासिक विवाद पर उनका क्या पक्ष है, यह बताना होगा। यह मामला आने वाले समय में ताजमहल की ऐतिहासिक पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस को जन्म दे सकता है।