आरोपों के बीच पारदर्शिता पर जोर
अयोध्या । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों के बीच पहली बार अपने वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं। ट्रस्ट ने दान, खर्च और कीमती धातुओं के उपयोग का एक विस्तृत ब्यौरा जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि उसके गठन के बाद से प्राप्त हर एक रुपये का हिसाब दर्ज है। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी श्रद्धालु अपने दान के सत्यापन के लिए इसकी जांच करा सकता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार कार्रवाई कर रहा है। जांच एजेंसियां नकदी, दान पेटियों, सोना-चांदी, विदेशी मुद्रा और अन्य वित्तीय लेन-देन की गहन जांच में जुटी हैं, और अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
ट्रस्ट के अनुसार, उसके गठन के बाद से उसे कुल 3,264 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इसमें निधि समर्पण अभियान, कॉर्पस फंड, देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और अन्य स्वैच्छिक योगदान शामिल हैं। ट्रस्ट का दावा है कि प्रत्येक दान का विधिवत रिकॉर्ड रखा गया है और वित्तीय प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी दान का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया गया है। जहां तक खर्च का सवाल है, ट्रस्ट ने उसका भी विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया है। अब तक कुल 2,370 करोड़ रुपये राम मंदिर के निर्माण, मंदिर परिसर के विकास, पूंजीगत परियोजनाओं और धार्मिक एवं आधारभूत ढांचे के निर्माण पर खर्च किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं के चढ़ावे से प्राप्त 391 करोड़ रुपये मंदिर के दैनिक संचालन, प्रशासनिक व्यवस्था, तीर्थयात्रियों की सुविधाओं, धार्मिक अनुष्ठानों और रखरखाव पर व्यय किए गए हैं। इस तरह, ट्रस्ट के अनुसार अब तक कुल 2,761 करोड़ रुपये विभिन्न मदों में खर्च किए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि भविष्य की परियोजनाओं और निर्माण कार्यों के लिए सुरक्षित रखी गई है। हाल के दिनों में सबसे अधिक सवाल श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई सोना-चांदी को लेकर उठे थे, जिसमें विशेष रूप से चांदी के स्पष्ट हिसाब-किताब न होने के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों पर ट्रस्ट ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि दान में मिली चांदी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पिघलाया गया। यह प्रक्रिया मंदिर निर्माण, धार्मिक उपयोग और सजावट से जुड़े कार्यों के लिए अपनाई गई। ट्रस्ट ने जोर देकर कहा कि चांदी गायब नहीं हुई है, बल्कि उसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है और उसका उपयोग नियमानुसार किया जा रहा है। दान में मिली कीमती वस्तुओं को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए ट्रस्ट ने कई बहुमूल्य उपहारों और धार्मिक वस्तुओं को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित भी किया। इनमें सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई गई है, विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा कई आभूषण, स्वर्ण आभूषण और अन्य बहुमूल्य भेंट भी मीडिया और आम लोगों के सामने रखी गईं। ट्रस्ट का कहना है कि सभी कीमती वस्तुएं पूरी सुरक्षा के साथ संरक्षित हैं और उनका रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रूप से रखा गया है। ट्रस्ट का मानना है कि हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे को लेकर कई तरह की अटकलें और आरोप लगाए गए, जिससे श्रद्धालुओं के मन में संशय पैदा हुआ। ऐसे में श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से ट्रस्ट ने अपनी वित्तीय स्थिति, आय-व्यय और दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने का फैसला किया। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आरोप को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए, न कि केवल अफवाहों के आधार पर। उसका दावा है कि जिस कथित चोरी की जांच चल रही है, वह कुछ व्यक्तियों की आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा मामला है और उसका ट्रस्ट की आधिकारिक लेखा-प्रणाली या फंड प्रबंधन से कोई संबंध नहीं है।

