मन का कचरा हटेगा तभी भरेंगे श्रेष्ठ विचारों के संस्कार

धार्मिक

:: गीता भवन में भागवत ज्ञान यज्ञ में बोले स्वामी प्रणवानंद सरस्वती; आज राम-कृष्ण जन्मोत्सव ::
इंदौर । जिस तरह शरीर की सफाई के लिए साबुन जरूरी है, उसी तरह मन में जमा नकारात्मक विचारों की शुद्धि सत्संग, संकीर्तन और भक्ति से ही संभव है। जब तक मन का कचरा खाली नहीं होगा, श्रेष्ठ विचारों का खजाना नहीं भर पाएगा। यह बात वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने गीता भवन में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में कही।
भक्त मंडल एवं अखंड प्रणव योग वेदांत पारमार्थिक न्यास के तत्वावधान में आयोजित ज्ञान यज्ञ में स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने अमृत मंथन, मत्स्यावतार और वामन चरित्र प्रसंगों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भक्ति बाजार में मिलने वाली वस्तु नहीं, बल्कि मन के निर्मल भावों से उत्पन्न होने वाली अनुभूति है। भागवत जगत और जगदीश के मिलन का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि भगवान की प्रसन्नता प्रेम और पवित्र भावों से ही प्राप्त होती है। मनुष्य जीवन की सार्थकता तभी है, जब व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ और मोह से ऊपर उठकर अपने भीतर परमात्मा के अंश को अनुभव करे। सत्संग और कथा मन के विकारों को दूर कर जीवन को सही दिशा देते हैं।
कथा के प्रारंभ में भक्त मंडल की ओर से सुरेश शाहरा, राजेंद्र-रुक्मणी माहेश्वरी, रामविलास राठी, रश्मि रामनानी, लीला राजेश अग्रवाल, बंसतीलाल गोयल और माधुरी मृदुला शाहरा सहित श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया।
ज्ञान यज्ञ में देश के विभिन्न तीर्थस्थलों से आए संत-विद्वानों ने भी सहभागिता की। इनमें स्वामी भारतानंद सरस्वती, स्वामी पूर्णानंद सरस्वती, स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, स्वामी ब्रजेशानंद सरस्वती, स्वामी अतुलानंद सहित अनेक संत शामिल रहे।
गीता भवन में भागवत ज्ञान यज्ञ 23 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 6.30 बजे तक चलेगा। रविवार को राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग की कथा के साथ उत्सव मनाया जाएगा।
आयोजन समिति के अनुसार 20 जुलाई को गोवर्धन पूजा, 21 जुलाई को रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र तथा 22 जुलाई को परीक्षित मोक्ष प्रसंग होंगे। 23 जुलाई को हवन-पूजन के साथ कथा का समापन होगा। गुरु पूर्णिमा महोत्सव 29 जुलाई को झलारिया स्थित स्वामी श्रीअखंड वेदांत आश्रम में आयोजित किया जाएगा।