बच्चों को स्क्रीन नहीं, संस्कारों से जोड़ें

इंदौर

:: सैनी-माली महाकुंभ में डिजिटल अति पर चिंता; 250 प्रतिभाओं का सम्मान, शिक्षा और परिवार को मजबूत बनाने पर जोर ::
इंदौर । सोशल मीडिया और मोबाइल की बढ़ती दखल बच्चों और युवाओं के व्यवहार व सोच को प्रभावित कर रही है। डिजिटल दुनिया में बढ़ती अनुचित सामग्री से बचाने के लिए तकनीक के संतुलित उपयोग और परिवार में संवाद बढ़ाने की जरूरत है। बच्चों को स्क्रीन की आदत से दूर रखकर संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यह चिंता सैनी-माली समाज के प्रादेशिक महाकुंभ में सामने आई।
रविंद्र नाट्यगृह में आयोजित महाकुंभ में शिक्षा, संस्कार, रोजगार और पारिवारिक मूल्यों को लेकर समाजजनों ने मंथन किया। जननायिका मां सावित्रीबाई फुले शिक्षा समाज विकास संस्थान के तत्वावधान में हुए आयोजन में इंदौर सहित मालवा-निमाड़ के 15 जिलों से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
आयोजन समिति अध्यक्ष पुरुषोत्तम सैनी ने बताया कि महाकुंभ का उद्देश्य समाज की प्रतिभाओं को सम्मान देना और नई पीढ़ी को शिक्षा व संस्कारों की दिशा में आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम में रामकिशन सैनी, सत्यनारायण कच्छावा, सोनू गहलोत और मनोहर जी सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे।
:: 250 प्रतिभाओं का सम्मान ::
महाकुंभ में समाज की 250 से अधिक प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इनमें नव-नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, अधिवक्ता तथा बोर्ड परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी शामिल रहे।
अतिथियों ने कहा कि प्रतिभाओं का सम्मान केवल उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का माध्यम है। ऐसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।
:: लक्ष्य, अनुशासन और मेहनत से मिलेगी सफलता ::
हरियाणा के कैथल से आए मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. विनय गुप्ता ने बच्चों, युवाओं और अभिभावकों से संवाद करते हुए सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारण, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सही करियर प्रबंधन को जरूरी बताया।
उन्होंने युवाओं को अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाने की सलाह दी। कहा कि नशा, ऑनलाइन सट्टेबाजी और कम समय में सफलता पाने की मानसिकता भविष्य के लिए नुकसानदायक है। सफलता निरंतर मेहनत और सही दिशा से मिलती है।
:: बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर रखें नजर ::
डॉ. गुप्ता ने कहा कि सोशल मीडिया, ओटीटी और मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के व्यवहार और सोच को प्रभावित कर सकता है। अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिताने, उनकी डिजिटल गतिविधियों को समझने और संवाद बनाए रखने की जरूरत है।
उन्होंने बच्चों को अनजान लोगों से संपर्क करने, बिना सोच-समझे किसी से लिफ्ट या उपहार लेने से बचने की सलाह दी। माता-पिता से बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन और अच्छे व्यवहार के संस्कार विकसित करने का आह्वान किया।
:: तकनीक का उपयोग करें, निर्भरता से बचें ::
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर डॉ. गुप्ता ने कहा कि तकनीक जीवन को आसान बनाने का माध्यम है, लेकिन अत्यधिक निर्भरता रचनात्मक सोच को कमजोर कर सकती है। युवाओं को तकनीक के साथ अपनी मौलिक सोच और सीखने की क्षमता भी मजबूत रखनी होगी।
उन्होंने युवाओं से शिक्षा और करियर को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर बनने, फास्ट फूड, शीतल पेय और नशे से दूर रहने की अपील की।
महाकुंभ में शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता को लेकर समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता दिखाई दी। आयोजन को सफल बनाने में मोहन पटेल, राजू सैनी, जितेंद्र मावर, अनिल सुमन, मनीष सैनी, कुलदीप कछावाह और पुनीत सैनी सहित विभिन्न समितियों के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।