सांस्कृतिक धरोहर और उसके संरक्षण के लिए जागरूक बने नई पीढ़ी……

साहित्य

पुस्तक चर्चा

 बुधवार को डाक से संस्कृति वैभव की वार्षिक पत्रिका का चतुर्थ अंक प्राप्त हुआ। पत्रिका में चार खंडों पुरातत्व और इतिहास खंड, धर्म – संस्कृति खंड, सहकार सेवा खंड एवं पर्यटन खंड में विभक्त हैं जिनमें 28 शोध आलेख शामिल किए गए हैं। पुरातत्व, कला, इतिहास और संस्कृति पर आधारित शोध पत्रिका इन विषयों में रुचि रखने वाले विद्वानों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी पत्रिका है। सभी शोध आलेख विषय के विशेषज्ञों द्वारा काफी परिश्रम कर लिखे गए हैं। पत्रिका के शोध आलेख राजस्थान, मालवा और मध्यप्रदेश के विविध विषयों पर नई रोशनी डालते हुए नए तथ्यों को उजागर करते हैं और शोधार्थियों में जिज्ञासा उत्पन्न करने में सहायक है।

   पुरातत्त्व और इतिहास खण्ड  में डॉ. धर्मजीत कौर अधीक्षक ( तकनीकी) निदेशालय पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग राजस्थान ने अपने शोध आलेख में चामुण्डा देवी की विशिष्ट प्रतिमाओं का विश्लेषण किया है। जैसलमेर क्षेत्र से प्राप्त पाषाणयुगीन अवशेष पर डॉ. नारायण व्यास ने शोध लेख लिखा है। महाकाल क्षेत्र का पुरावैभव नवीन अवशेष विषय को डॉ. ध्रुवेन्द्र सिह जोधा ने

अपने शोध का आधार बनाया है। ऐसे ही  डॉ अंजना सिंह गौर ने उज्जयिनी के विक्रान्त भैरव मन्दिर का पुराशिल्प पर खोज परक लेख लिखा है।  डॉ. एकता व्यास ने पुरातात्त्विक स्त्रोत एवं वेशिक नायिकाओं का अध्ययन को अपना विषय चुना है। बूंदी के शैलचित्रों का लोक सांस्कृतिक अध्ययन पर कोटा की  डॉ. नेहा प्रधान ने अपनी खोज पूर्ण दृष्टि डाली है।

    बाघ की गुफाओं का स्थापत्य को खोज कर लाई हैं डॉ. अनीता पाण्डे, प्राचीन मालवा के प्रमुख अभिलेख पर डॉ. प्रीति पाण्डे, क्लासीफिकेशन ऑफ आर्किटेक्चर ऑफ बीकानेर पर डॉ. उमा दुबे, बांसवाड़ा-छीछ का अचर्चित ब्रह्मा मन्दिर पर डॉ. अदिति गौड़,

बघेरा (केकड़ी) का अल्पज्ञात मूर्तिशिल्प पर

श्रीमती पुष्पा शर्मा, इतिहास की अनमोल धरोहर बारां क्षेत्र के शैल चित्र परहंसराज नागर, बाडौली से प्राप्त शेषशायी विष्णु प्रतिमा का शिल्प सौन्दर्य पर डॉ. नरेन्द्र कुमार मीणा,

हाड़ौती की बावड़ियों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, बौद्ध धर्म के प्रमुख आठ ऐतिहासिक स्थल पर डॉ. शालिनी गुप्ता, भण्डदेवरा शिव मन्दिर का शिल्प सौन्दर्य पर डॉ. हेमलता वैष्णव,अद्भुत चामुण्डा नवग्रह मूर्ति पर डॉ. अनुपमा पंवार, कोटा के प्राचीन कंसुवा शिव मन्दिर का शिल्प पर 

ललित शर्मा, हिन्दुओं का बड़शाह कश्मीर सुल्तान जैनुअल आबेदीन पर डॉ. सहदेव सिंह चौहान, बौद्ध देव कुल में देवियाँ पर डॉ. सुनीता वाड़िया ने शोध परख आलेख लिखे हैं।

   धर्म संस्कृति खण्ड  में धर्म की अवधारणा-एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य परडॉ. निधि सजवान, नारायणा धाम-कृष्ण सुदाना का मैत्री स्थल पर डॉ. मंजु यादव, प्राचीन ऊषा मन्दिर (बयाना) पर डॉ. प्रीति शर्मा , उज्जैन स्थित ग़ज़लक्ष्मी एवं दशावतार प्रतिमा पर डॉ. श्वेता पाठक , सहकार सेवा खंड में त्रिभुवन सहकारी विश्विद्यालय – एक परिचय पर डॉ. बलविंदर सिंह गिल, पर्यटन खंड में झालावाड़ जिले में इको – ट्यूरिज्म की संभावना पर संजू कुमार शर्मा, बारां जिला पर्यटन परिचय पर राकेश शर्मा एवं शेरगढ़ दुर्ग एक परिचय पर गजेन्द्र सिंह यादव ने शोध परख आलेख लिखें हैं।

     संपादक मंडल डॉ. धर्मजीत कौर अधीक्षक ( तकनीकी) निदेशालय पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग राजस्थान, डॉ. सुश्री मुक्ति पाराशर कोटा एवं ललित शर्मा इतिहासकार झालावाड़

संपादकीय में लिखते हैं कि पत्रिका का उद्देश्य भारतीय संस्कृति की स्थानीय धरोहरों की प्रदेश भर में पहचान बने और पाठ्यक्रमों में प्रचलित करना है। नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति जागरूक बन इनके संरक्षण में योगदान करे। पत्रिका का आवरण पृष्ठ बहुत सुंदर है जो भारतीय स्थापत्य और मूर्ति कला के उच्चतम प्रतिमानों को मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर समूह के कंदरिया महादेव मंदिर को दर्शाता है और पत्रिका का मंतव्य भी पूर्ण करता है।

पत्रिका : संस्कृति वैभव

संपादक मंडल : डॉ. धर्मजीत कौर, डॉ. मुक्ति पाराशर, ललित शर्मा

प्रकाशक : काव्यांजलि, कोटा 

प्रकाशन संस्था : हिंद की सांस्कृतिक विरासत, झालावाड़

मूल्य : 300 ₹

समीक्षक

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल   लेखक एवं पत्रकार, कोटा