हल्द्वानी । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई रैली के दो दिन बाद वहां कराए गए ‘शुद्धिकरण’ यज्ञ को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे खरगे के दलित होने से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर दलित विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा ने यज्ञ से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के जिलाध्यक्ष इन्द्रपाल आर्य के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बुधवार को बुद्ध पार्क में प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि खरगे के दलित होने के कारण मैदान का शुद्धिकरण कराया गया। इसे उन्होंने केवल खरगे ही नहीं, बल्कि पूरे अनुसूचित जाति समाज के सम्मान और स्वाभिमान का अपमान बताया। कांग्रेस का कहना है कि ऐसे आयोजनों से जातिगत भेदभाव की मानसिकता को बढ़ावा मिलता है। रामलीला मैदान में 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने हवन-पूजन कराया था। संगठन के सचिव राम अवस्थी के नेतृत्व में हुए इस आयोजन को मैदान की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा बहाल करने का प्रयास बताया गया। संगठन का दावा है कि खरगे की रैली के दौरान कथित तौर पर इस्लामिक नारे लगाए गए और हिंदू संगठनों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इसी वजह से शुद्धिकरण यज्ञ कराने की बात कही गई। संगठन के सदस्य गिरीश चंद्र पांडे ने स्पष्ट किया कि न्यास का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है। भाजपा के नैनीताल जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने भी कहा कि यज्ञ निजी संगठन का कार्यक्रम था और भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
कांग्रेस और भाजपा में बढ़ा रार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर शुद्धिकरण कराया गया और इसे खरगे के साथ पूरे दलित समाज का अपमान बताया। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस पर सनातन धर्म और सामाजिक सौहार्द के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।कैबिनेट मंत्री खजानदास ने दावा किया कि कांग्रेस की रैली में धर्म विशेष के नारे लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान का धार्मिक महत्व है और वहां इस तरह की नारेबाजी स्वीकार्य नहीं है। इस विवाद के बाद हल्द्वानी में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

