:: राज्य महिला आयोग तैयार करेगा नियमावली और एसओपी, केस ट्रैकिंग व अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर ::
इंदौर । घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को शिकायत से लेकर राहत मिलने तक सरल, स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग राज्य-स्तरीय नियमावली और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा। आयोग की कार्यशाला में घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के करीब दो दशक के क्रियान्वयन की समीक्षा कर जमीनी कमियों और व्यावहारिक चुनौतियों पर मंथन किया गया।
कार्यशाला में आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव, सदस्य साधना स्थापक तथा अधिवक्ता अरविंद जैन और अभिजीत राठौर ने अधिनियम के प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार रखे। संरक्षण अधिकारियों, पुलिस, सेवा प्रदाताओं और न्यायालयों की भूमिका के साथ शिकायत दर्ज होने से राहत आदेश तक की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। अंतरिम राहत, निवास, संरक्षण, भरण-पोषण और क्षतिपूर्ति जैसे प्रावधान भी चर्चा के केंद्र में रहे।
:: केस ट्रैकिंग और जवाबदेही बनेगी व्यवस्था का हिस्सा ::
जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने बताया कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच, विभागों के बीच समन्वय और अधिकारियों की जवाबदेही प्रमुख चुनौतियां हैं। समूह चर्चा में आपातकालीन एवं जोखिम-आधारित हस्तक्षेप, केस ट्रैकिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, आश्रय गृहों और सेवा प्रदाताओं के मानक तथा अधिकारियों के प्रशिक्षण को प्रस्तावित एसओपी में शामिल करने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में विभागवार जिम्मेदारियां, कार्यों की समय-सीमा तथा निगरानी एवं समीक्षा तंत्र तय करने पर भी समूह कार्य हुआ। आयोग कार्यशाला में मिले सुझावों को समेकित कर संबंधित विभागों और हितधारकों से परामर्श के बाद राज्य-स्तरीय नियमावली एवं एसओपी का प्रारूप तैयार करेगा।

