गुजरात विद्यापीठ का 72वां दीक्षांत समारोह: अमित शाह ने युवाओं को दिया राष्ट्रसेवा का संदेश

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अहमदाबाद में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रहे मौजूद, राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दिया दीक्षांत संबोधन

  • 900 विद्यार्थियों को मिली डिग्रियां, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 11 विद्यार्थी पदकों से सम्मानित
    अहमदाबाद (ईएमएस)। महात्मा गांधी की विचारधारा और मूल्यों से प्रेरित प्रतिष्ठित गुजरात विद्यापीठ का 72वां दीक्षांत समारोह अहमदाबाद में गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह विशेष रूप से उपस्थित रहे, जबकि गुजरात के राज्यपाल एवं गुजरात विद्यापीठ के कुलाधिपति आचार्य देवव्रत ने विद्यार्थियों को दीक्षांत संबोधन दिया।
    समारोह के दौरान गुजरात विद्यापीठ के विभिन्न अध्ययनक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले लगभग 900 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। सात विद्याशाखाओं के 18 विभागों के स्नातक एवं उपाधिधारक विद्यार्थियों ने इस ऐतिहासिक समारोह में हिस्सा लिया। वर्षों की मेहनत, लगन और शैक्षणिक उपलब्धियों के बाद डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर जीवन के नए अध्याय की शुरुआत जैसा रहा।
    दीक्षांत समारोह में केवल डिग्री वितरण ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की प्रतिभा को भी विशेष सम्मान दिया गया। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि हासिल करने वाले 11 विद्यार्थियों को मंदिर चंद्रक और ध्वज चंद्रक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके अध्ययन और अकादमिक क्षेत्र में किए गए श्रेष्ठ प्रदर्शन की पहचान के रूप में प्रदान किया गया।
    समारोह में विभिन्न संकायों और विभागों के विद्यार्थियों ने अपनी डिग्रियां प्राप्त कर उच्च शिक्षा की एक महत्वपूर्ण यात्रा पूरी की। अब ये युवा विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल के साथ रोजगार, शोध, सामाजिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में नई जिम्मेदारियां संभालने के लिए आगे बढ़ेंगे।
    दीक्षांत समारोह में सभी करीब 900 डिग्रीधारकों को बधाई देते हुए वक्ता ने गुजरात विद्यापीठ से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को भी साझा किया। उन्होंने भावुकता के साथ कहा कि एक समय वह गुजरात विद्यापीठ की लाइब्रेरी में बैठकर खूब अध्ययन किया करते थे और उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन उन्हें इसी प्रतिष्ठित संस्थान में अतिथि के रूप में आने का अवसर मिलेगा।
    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अपना स्पष्ट लक्ष्य तय करना आवश्यक है। युवाओं को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश, समाज और आम लोगों की सेवा को भी अपने जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए।
    अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से कभी घबराना या हार मानना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य तुरंत प्राप्त न हो तो निराश होने के बजाय निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
    उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। असफलताएं और चुनौतियां जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प और लगातार परिश्रम के माध्यम से ही व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है।
    महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए वक्ता ने कहा कि जीवन में अनेक महान व्यक्तियों और विचारकों को पढ़ने का अवसर मिला, लेकिन सबसे अधिक प्रेरणा उन्हें महात्मा गांधी के संदेश और विचारों से मिली। उन्होंने कहा कि गांधीजी के विचार केवल इतिहास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अतीत में जितने प्रासंगिक थे, आज भी उतने ही उपयोगी हैं और भविष्य में भी मानव समाज को दिशा देते रहेंगे।
    गुजरात विद्यापीठ, जिसकी स्थापना महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय शिक्षा और भारतीय मूल्यों के उद्देश्य से की थी, आज भी शिक्षा के साथ सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। ऐसे संस्थान में डिग्री प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा के संस्कारों को जीवन में उतारने का अवसर भी है।
    72वां दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत और उपलब्धियों के सम्मान के साथ-साथ उनके भविष्य के लिए नई शुरुआत का संदेश भी लेकर आया। समारोह में उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने सभी डिग्रीधारकों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और उनसे ज्ञान का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के हित में करने का आह्वान किया।
    डिग्री हासिल करने वाले इन लगभग 900 विद्यार्थियों के लिए यह दिन निश्चित रूप से यादगार बन गया। गुजरात विद्यापीठ का यह दीक्षांत समारोह शिक्षा, संस्कार, उत्कृष्टता और राष्ट्रसेवा के संदेश के साथ संपन्न हुआ और युवा पीढ़ी को अपने सपनों के साथ देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दे गया।