:: दो दिवसीय रामामृतम ध्यान शिविर में सात मिनट की साधना से आत्मचिंतन का अभ्यास; समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने का संदेश ::
इंदौर (ईएमएस)। जेल में बंदियों के भीतर सकारात्मक बदलाव और आत्मविश्वास जगाने की पहल के तहत सेंट्रल जेल इंदौर में दो दिवसीय रामामृतम ध्यान साधना शिविर आयोजित किया गया। साधुमार्गी जैन समता संघ के तत्वावधान में हुए शिविर में करीब 800 बंदियों ने हिस्सा लिया। उन्हें ध्यान के जरिए आत्मचिंतन, मानसिक शांति और सकारात्मक सोच का अभ्यास कराया गया तथा जेल से बाहर आने के बाद समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़कर जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया गया।
साधुमार्गी जैन समता संघ के अध्यक्ष पारस बोहरा एवं मीडिया प्रभारी मनीष बोहरा ने बताया कि प.पू. आदित्य मुनि म.सा. एवं अटल मुनि म.सा. के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित संजय चुघ और रोहित जैन ने बंदियों को रामामृतम ध्यान साधना कराई। उन्होंने बताया कि करीब सात मिनट की यह साधना व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने, अपनी सकारात्मक शक्ति पहचानने तथा मन को शांत और संतुलित रखने में मदद करती है।
:: एक गलती जीवन का अंत नहीं, नई शुरुआत का अवसर ::
प्रशिक्षकों ने बंदियों से कहा कि जीवन में हुई एक गलती को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। सही दिशा, आत्मचिंतन और प्रयास से जीवन को नई शुरुआत दी जा सकती है। उन्होंने बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटकर जागरूक, सकारात्मक और सशक्त नागरिक की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि मानसिक शांति और स्वयं में परिवर्तन लाने का अवसर प्रत्येक व्यक्ति के पास है। जागृति परिवर्तन का पहला चरण है और जागृत मन से ही जागृत समाज का निर्माण संभव है। रामामृतम ध्यान साधना का उद्देश्य भी व्यक्ति के भीतर इसी जागृति को विकसित करना है।
शिविर में सेंट्रल जेल अधीक्षक दिनेश नरगावा, संतोष डांगी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने साधुमार्गी जैन समता संघ के अध्यक्ष पारस बोहरा एवं प्रशिक्षकों का स्वागत किया।

