कहीं भीषण गर्मी तो कहीं बाढ़-भूस्खलन में अलनीनो निभा रहा अहम भूमिका

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-समुद्र का तापमान बढ़ना समुद्री जीवन के लिए ही खतरा नहीं, मौसम पर भी पड़ती है मार
नई दिल्ली | कहीं भीषण गर्मी तो कहीं कम समय में तेज बारिश से बाढ़ और भूस्खलन जैसे हालात बन रहे हैं। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन के साथ इस समय मजबूत हो रहा अल नीनो भी अहम भूमिका निभा रहा है। हालिया आंकड़े इस बदलाव की गंभीर तस्वीर दिखाते हैं। 22 अगस्त को दुनिया के समुद्रों का औसत सतही तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो 1979 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले रिकॉर्ड 21.09 डिग्री सेल्सियस का था, जो मार्च 2024 में दर्ज हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र धरती की अतिरिक्त गर्मी का बहुत बड़ा हिस्सा अपने अंदर जमा करता है। इसलिए समुद्र का तापमान बढ़ना केवल समुद्री जीवन के लिए खतरा नहीं, बल्कि इसका असर पूरी मौसम व्यवस्था पर पड़ सकता है। गर्म समुद्री पानी से वाष्पीकरण बढ़ता है। इससे वातावरण में ज्यादा नमी पहुंच सकती है और कुछ इलाकों में भारी बारिश और तूफानों की ताकत बढ़ सकती है। दूसरी ओर समुद्र का गर्म होना मछलियों, प्रवाल भित्तियों और दूसरे समुद्री जीवों के लिए भी परेशानी बढ़ाता है। वैज्ञानिकों ने समुद्र के इस नए रिकॉर्ड को बेहद चिंताजनक बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस समय दुनिया एक मजबूत अल नीनो का सामना कर रही है। पूर्वानुमान के मुताबिक अल नीनो के 2026 के अंत तक और मजबूत होने की संभावना है। अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान बहुत मजबूत अल नीनो की संभावना 90 फीसदी से ज्यादा बताई गई है। एक आकलन में इस अवधि में ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत घटना की 69 फीसदी संभावना भी जताई गई है। वैज्ञानिक मॉडल यह भी संकेत दे रहे हैं कि मौजूदा अल नीनो अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच अपने चरम पर पहुंच सकता है और इसकी ताकत पुराने सबसे मजबूत अल नीनो घटनाक्रमों के स्तर के करीब जा सकती है।
वहीं भारत में इस साल मानसून में कई जगह भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं देखने को मिली हैं। हिमाचल प्रदेश इसका उदाहरण है। 30 जून से 23 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश में 224 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 91 मौतें बारिश से जुड़ी आपदाओं, जैसे भूस्खलन, बादल फटने और डूबने जैसी घटनाओं से हुईं। राज्य में 149 सड़कें बंद रहीं और मानसून से हुआ कुल नुकसान 1,121 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच गया।
भारत में जहां बारिश और बाढ़ चिंता बढ़ा रही है, वहीं यूरोप के कई हिस्से लगातार भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। 2026 की गर्मियों में लगातार कई रिकॉर्ड गर्मी की लहरें देखने को मिली हैं। हालिया आकलन के मुताबिक यूरोप में इस गर्मी की लगातार चार बड़ी हीटवेव से कम से कम 35,000 अतिरिक्त मौतें जुड़ी हो सकती हैं। जर्मनी, फ्रांस और स्पेन में ही 25,000 से ज्यादा अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। ये आंकड़े शुरुआती हैं और कई देशों से अगस्त का पूरा डेटा अभी सामने नहीं आया है।