प्रधानमंत्री मोदी ने जन्माष्टमी पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं

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-सोशल मीडिया पर शेयर किया विशेष श्लोक
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन्माष्टमी के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने अपने बधाई संदेश में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों की महत्ता पर प्रकाश डाला और कामना की कि यह पवित्र अवसर सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार करे। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा, आप सभी को जन्माष्टमी की अनेकानेक शुभकामनाएं। भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों में नि:स्वार्थ कर्म की अद्भुत प्रेरणा निहित है, जिसने मानवता का निरंतर मार्गदर्शन किया है। यह संदेश भगवान कृष्ण के कर्मयोग के सिद्धांत पर जोर देता है, जो फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करने की शिक्षा देता है। अपनी शुभकामनाओं के साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने एक विशेष सुभाषितम् भी साझा किया, जो भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। उन्होंने संस्कृत श्लोक वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥ पोस्ट किया।
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है- वसुदेव के पुत्र, देव स्वरूप, कंस और चाणूर जैसे दुष्टों का संहार करने वाले, माता देवकी को परम आनंद प्रदान करने वाले, जगतगुरु भगवान श्रीकृष्ण की मैं वंदना करता हूं। यह श्लोक भगवान कृष्ण के विभिन्न गुणों – उनके दिव्य जन्म, दुष्टों का नाश करने की उनकी शक्ति, उनकी माता के प्रति उनके प्रेम और जगत के गुरु के रूप में उनकी भूमिका का सुंदर वर्णन करता है। यह प्रसिद्ध श्लोक आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कृष्णाष्टकम स्तोत्र से लिया गया है। कृष्णाष्टकम अद्वैत वेदांत के महान प्रणेता और भारतीय दर्शन के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा भगवान श्री कृष्ण की स्तुति में रचे गए आठ श्लोकों का एक अत्यंत पवित्र और दिव्य स्तोत्र है। इस श्लोक को स्तोत्र का प्रथम श्लोक या मंगलाचरण माना जाता है, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में भगवान के आह्वान का प्रतीक है।
जन्माष्टमी का पावन पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारतवर्ष में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात के समय भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश करने के लिए देवकी और वसुदेव के यहां श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों को सजाते हैं, भगवान कृष्ण की मूर्तियों को झूले में झुलाते हैं और आधी रात को उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। दही हांडी जैसे आयोजन भी इस पर्व की रौनक बढ़ाते हैं, जो भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को दर्शाते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी एक अभिन्न अंग है, जो हर साल लाखों लोगों को एकजुट करता है।