-इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- पुलिस एफआईआर न लिखे तो पहले मजिस्ट्रेट से करें संपर्क, सीधे अनुच्छेद 226 के तहत याचिका उचित नहीं
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं करती है तो संबंधित व्यक्ति को सीधे हाईकोर्ट आने के बजाय कानून में उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने चाहिए।
न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने रमेश उपाध्याय की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि एक वीडियो में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उपाध्याय समुदाय और धार्मिक व्यक्तित्वों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी भावनाएं आहत होने का दावा किया था। उन्होंने वाराणसी के पुलिस आयुक्त से शिकायत कर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। सरकार ने कहा कि याची ने संबंधित थाने या मजिस्ट्रेट के समक्ष उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया था। साथ ही रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि पुलिस को शिकायत प्राप्त हुई थी।
धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क का विकल्प
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं करती है तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट के पास प्राथमिकी दर्ज कराने, जांच का आदेश देने और जांच की निगरानी करने की शक्ति है। अदालत ने टिप्पणी की कि उपलब्ध वैधानिक उपाय को छोड़कर सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट पहुंचने से संवैधानिक अदालत प्रथम स्तर का मंच बन जाएगी, जो उचित प्रक्रिया नहीं है। याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी है।

