श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भारतीय आध्यात्मिक दर्शन, आधुनिक संगीत और शास्त्रीय कला के अनूठे संगम के रूप में ‘मैं ही कृष्ण, मैं ही राम’ संगीत प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना है। यह आध्यात्मिक रैप श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन और उसके गहरे संदेश को समकालीन संगीत शैली के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का रचनात्मक प्रयास है।
गीत के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, कर्म, आत्म-खोज और जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों को आधुनिक संगीत की अभिव्यक्ति में प्रस्तुत किया गया है। जन्माष्टमी जैसे पावन अवसर पर यह प्रस्तुति भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ने का विशेष प्रयास है।इस गीत का संगीत वीडियो एक युवा कथक कलाकार की प्रेरणादायी यात्रा को दर्शाता है। कहानी गंडा बंधन की पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा से शुरू होकर साधना, अनुशासन, समर्पण और निरंतर संघर्ष के माध्यम से कला में निपुणता तथा आत्म-खोज की यात्रा को सामने लाती है। यह कहानी केवल नृत्य की नहीं, बल्कि जुनून, उद्देश्य, धैर्य, भक्ति और आंतरिक परिवर्तन की कहानी है।

