जातीय जनगणना के मुद्दे पर गहलोत का मोदी सरकार पर तीखा हमला, बोले- ‘सही आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय अधूरा’

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कांग्रेस का आरोप-2021 से लंबित है जातीय जनगणना की मांग; मौजूदा प्रक्रिया में खामियां, ओबीसी-ईबीसी की वास्तविक संख्या सामने आने पर उठाए सवाल
अहमदाबाद । जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से केंद्र सरकार से वैज्ञानिक, पारदर्शी और सही तरीके से जातीय जनगणना कराने की मांग करती रही है, लेकिन सरकार ने इस दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना की मांग वर्ष 2021 से लंबित रही है और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी वर्ष 2023 से लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते आ रहे हैं।
गहलोत के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त रूप से पत्र लिखकर जातीय जनगणना को लेकर अपनी मांग और चिंताएं सामने रखी थीं। इससे पहले खड़गे ने 16 अप्रैल 2023 को पहला पत्र तथा 5 मई 2025 को रचनात्मक सुझावों के साथ दूसरा पत्र प्रधानमंत्री को भेजा था। कांग्रेस का दावा है कि इन पत्रों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।

  • ‘सही आंकड़ों के बिना नीतियां बनाना मुश्किल’
    अशोक गहलोत ने कहा कि जातीय जनगणना केवल किसी समुदाय की संख्या जानने का विषय नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, सरकारी रोजगार और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में लक्षित भागीदारी तय करने का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। उन्होंने कहा कि यदि विभिन्न जातियों और सामाजिक समूहों की विश्वसनीय जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सरकार के लिए यह आकलन करना कठिन होगा कि विभिन्न क्षेत्रों में किस समुदाय की वास्तविक भागीदारी कितनी है। विशेष रूप से ओबीसी और ईबीसी वर्ग की विधानसभा, लोकसभा, नौकरशाही, उच्च न्यायपालिका तथा अन्य संस्थाओं में भागीदारी की तुलना उनकी जनसंख्या के अनुपात से करने में भी कठिनाई होगी।
    गहलोत ने आय, संपत्ति, रोजगार, व्यवसाय, कॉरपोरेट नेतृत्व और आर्थिक अवसरों में ओबीसी-ईबीसी की भागीदारी के लिए विश्वसनीय आधाररेखा तैयार किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
  • मौजूदा प्रारूप पर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल
    कांग्रेस नेता ने आगामी जनगणना में जाति संबंधी सवालों के मौजूदा प्रारूप पर भी गंभीर आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि प्रस्तावित प्रश्नावली में जातीय पहचान को दर्ज करने की प्रक्रिया ऐसी है, जिससे देश में ओबीसी सहित विभिन्न पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या का सटीक आंकड़ा सामने आने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र और राज्य सरकारों के पास देश की हजारों जातियों की सूची पहले से उपलब्ध है, तो देशव्यापी जातीय जनगणना में प्रमाणित ‘ड्रॉपडाउन लिस्ट’ का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है।
    गहलोत के अनुसार, ड्रॉपडाउन लिस्ट में सरकार द्वारा मान्य जातियों की पूर्वनिर्धारित सूची होती है और गणनाकर्मी नागरिक द्वारा बताई गई जाति के आधार पर सूची में उपलब्ध उपयुक्त विकल्प का चयन कर सकता है। इसके विपरीत ओपन-एंडेड व्यवस्था में नागरिक अपनी जाति या उपजाति का नाम जिस रूप में बताएगा, गणनाकर्मी उसे उसी रूप में दर्ज करेगा।
  • ‘एक ही जाति के कई नाम दर्ज होने का खतरा’
    कांग्रेस का तर्क है कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों, स्थानीय बोलियों तथा भाषाई रूपों में पहचानी जाती है। ऐसे में यदि पूर्वनिर्धारित सूची नहीं होगी तो घर-घर जाकर जानकारी जुटाने के दौरान एक ही जाति के कई अलग-अलग नाम दर्ज हो सकते हैं। गहलोत ने कहा कि क्षेत्रीय उच्चारण, पर्यायवाची नाम, उपजातियों और वर्तनी के अंतर के कारण एक ही सामाजिक समूह के आंकड़े कई हिस्सों में बंट सकते हैं। इससे जातीय जनगणना से प्राप्त आंकड़ों की उपयोगिता प्रभावित होने की आशंका है।
    उन्होंने सवाल किया, “जब सरकार के पास जातियों की सूची पहले से उपलब्ध है तो ड्रॉपडाउन लिस्ट का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया? आखिर किसके निर्देश या इशारे पर पिछड़े वर्गों की जातियों की प्रमाणित सूची को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया?”
  • ‘गलत आंकड़ों की कीमत आने वाली पीढ़ियां चुकाएंगी’
    कांग्रेस नेता ने कहा कि जातीय जनगणना में गलत आंकड़े सामने आना केवल सांख्यिकीय त्रुटि नहीं होगी, बल्कि इसका सीधा असर सामाजिक न्याय और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि यदि किसी जाति के अलग-अलग नाम और वर्तनी के कारण उसका आंकड़ा अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज हो जाता है तो ओबीसी-ईबीसी सहित वंचित समुदायों की वास्तविक आबादी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन नहीं हो पाएगा। इससे सरकारी नीतियों और योजनाओं में उनके हिस्से का निर्धारण भी प्रभावित हो सकता है।
  • कांग्रेस ने प्रश्नावली में बदलाव की मांग की
    कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अंतिम रूप देने से पहले जातीय जनगणना की प्रश्नावली पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम जनता के साथ व्यापक चर्चा की जाए। पार्टी का कहना है कि ऐसा प्रारूप तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें देश के प्रत्येक जाति और समुदाय की वास्तविक संख्या विश्वसनीय तरीके से दर्ज हो सके। कांग्रेस के अनुसार, जातीय जनगणना सटीक, वैज्ञानिक, अर्थपूर्ण और सामाजिक न्याय की नीतियों के लिए उपयोगी तभी साबित होगी, जब आंकड़े एक समान और प्रमाणित प्रक्रिया के माध्यम से जुटाए जाएं।
  • हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ पर भी कांग्रेस ने जताया आक्रोश
    जातीय जनगणना के अलावा कांग्रेस ने उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित तौर पर गंगाजल छिड़ककर और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किए जाने के मामले पर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस ने इस घटना को केवल एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता के अपमान का मामला नहीं, बल्कि जातिवादी मानसिकता का गंभीर प्रदर्शन बताया। पार्टी ने कहा कि भारत का संविधान समानता और सामाजिक न्याय की गारंटी देता है तथा ऐसी मानसिकता संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
  • एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग
    कांग्रेस ने मांग की है कि घटना से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, उपलब्ध वीडियो और कार्यक्रम के आयोजकों के सार्वजनिक बयानों की जांच की जाए। पार्टी ने उत्तराखंड पुलिस से तत्काल एफआईआर दर्ज करने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। कांग्रेस ने कार्यक्रम के आयोजकों और संबंधित संगठनों की पहचान सार्वजनिक करने तथा अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी सामने रखने की भी मांग की है।
  • प्रधानमंत्री से स्पष्ट प्रतिक्रिया की मांग
    कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस पूरे मामले पर स्पष्ट शब्दों में प्रतिक्रिया देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री को ऐसी घटनाओं की सार्वजनिक रूप से निंदा करनी चाहिए और दलित समाज को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि संविधान की मूल भावना और सामाजिक समानता के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी दलित, आदिवासी, ओबीसी, ईबीसी और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों तथा सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि देश में जातीय जनगणना सही, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से कराई जानी चाहिए, ताकि सामाजिक और आर्थिक नीतियों के निर्माण के लिए वास्तविक आंकड़े उपलब्ध हो सकें।