कोलकाता । पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव से ठीक पहले, कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या और राजनीतिक बदले की भावना करार दिया, वहीं मिलन प्रधान के चुनावी हलफनामे में तीन-तीन हत्या के गंभीर मामलों के खुलासे ने कांग्रेस को बचाव की मुद्रा में खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी गिरफ्तारी को अत्याचारी कूटनीति बताते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया था।
राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा गिरफ्तारी को केंद्र और राज्य सरकार की मिलीभगत बताए जाने के तुरंत बाद, मिलन प्रधान का चुनावी हलफनामा सार्वजनिक हुआ। इस हलफनामे में कांग्रेस उम्मीदवार ने स्वयं स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ तीन अलग-अलग हत्या के मामले दर्ज हैं। इन तीनों मर्डर केस में अदालतों की ओर से लंबे समय से गिरफ्तारी वारंट लंबित थे। नंदीग्राम पुलिस स्टेशन में दर्ज मामलों के अतिरिक्त, खेजुरी थाने में भी आर्म्स एक्ट और अन्य संगीन धाराओं के तहत वारंट जारी किए गए थे। चुनावी विश्लेषकों और विरोधी दलों के नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब कांग्रेस आलाकमान को अपने उम्मीदवार के खिलाफ कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लंबित होने की जानकारी थी, तो ऐसे दागी व्यक्ति को टिकट क्यों दिया गया? कानून के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव के दौरान किसी भी भगोड़े या गैर-जमानती वारंट वाले व्यक्ति को पुलिस किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस ने जानबूझकर ऐसा उम्मीदवार उतारा ताकि गिरफ्तारी होने पर चुनावी माहौल में विक्टिम कार्ड खेलकर लोकतंत्र की हत्या जैसा नैरेटिव स्थापित किया जा सके। रोचक बात यह है कि ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान दे द्वारा नाम वापस लेने के बाद, ममता ने तुरंत कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था, और इसके कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने कार्रवाई कर दी। राहुल गांधी के सोशल मीडिया पर राजनीतिक बदले के आरोपों के बाद, डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (एक विरोधी गुट) के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ऋतब्रत बनर्जी ने एक पोस्ट में लिखा, नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान के खिलाफ हत्या के तीन मामलों में गिरफ्तारी वारंट लंबित थे। हमने खुद इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। चुनाव के दौरान वारंट तामील कराना कानून का स्थापित नियम है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने शायद राहुल गांधी को पूरे और सही तथ्य नहीं बताए, जिसके कारण वे ऐसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति का बचाव कर रहे हैं।

