महुआ बोलीं- आयुक्तों को डरने की जरुरत नहीं है हम हैं न….

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नई दिल्ली । चुनाव आयोग में कथित मतभेद को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जाने का सिलसिला जारी है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से किसी भी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि दोनों आयुक्तों को अपने निर्णयों में स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि सरकार दोनों चुनाव आयुक्तों, उनके परिवार और सहयोगियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी अपील किसी राजनीतिक पद पर रहते हुए नहीं, बल्कि एक नागरिक के तौर पर है। महुआ ने अपने राजनीतिक जीवन में सदस्यता समाप्त होने और जांच एजेंसियों की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि वह दबाव के आगे नहीं झुकी थीं। उन्होंने चुनाव आयुक्तों से भी इसी तरह अपने फैसलों पर कायम रहने की अपील की।
महुआ ने कहा कि मौजूदा समय में चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों को इतिहास के संदर्भ में भी देखा जाएगा। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए आयुक्तों से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी चुनाव आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को लेकर कई सवाल उठाए हैं। आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों को निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा है कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। थरूर का कहना है कि सर्वसम्मति से अंतिम निर्णय होने की जानकारी से प्रक्रिया के दौरान उठाई गई आपत्तियों से जुड़े सवालों का पूरी तरह जवाब नहीं मिलता। उन्होंने पूछा कि क्या कथित 14 आपत्तियां वास्तव में दर्ज की गई थीं और यदि दर्ज हुई थीं तो प्रत्येक पर क्या निर्णय लिया गया। थरूर ने फॉर्म-6 में बदलाव के कानूनी आधार तथा मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों तक पहुंच को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने गोवा में कथित 97 मतदाताओं से जुड़े मामले और बहाल किए गए मतदाताओं के खिलाफ दायर अपीलों को लेकर भी सवाल उठाए। थरूर ने चुनाव आयोग से इन सभी मुद्दों पर बिंदुवार और दस्तावेजी जवाब देने की मांग की है। उनके अनुसार, अंतिम निर्णय सर्वसम्मत होने की बात अपने आप में निर्णय प्रक्रिया के दौरान उठाई गई आपत्तियों के निपटारे की स्थिति स्पष्ट नहीं करती।