लद्दाख के लिए वांगचुक की पदयात्रा, सीजेपी के बड़े नेता नदारद

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नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में 26 दिनों तक अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बदले में वह व्यापक साथ नहीं मिला, जिसके लिए उन्होंने आवाज लगाई थी। सोनम वांगचुक की लद्दाख पदयात्रा में हिस्सा लेने के लिए सीजेपी का एक भी बड़ा नेता लद्दाख नहीं गया। अभिजीत दीपके, सौरभ दास या आशुतोष रांका जैसे नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समर्थन की बात तो कही थी, लेकिन खुद वहां जाने से परहेज कर गए।
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान 24 सितंबर 2025 को केंद्र शासित प्रदेश में हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इसकी पहली बरसी के उपलक्ष्य में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को लेह में एक प्रतीकात्मक पदयात्रा का नेतृत्व किया। 24 सितंबर को शहीद दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया गया है। इससे पहले सोनम वांगचुक ने 19 से 24 सितंबर तक पदयात्रा की घोषणा करते हुए कॉकरोचों (सीजेपी सदस्यों) से भी इसमें शामिल होने की अपील की थी। दिल्ली से बनाए एक वीडियो में वांगचुक ने जंतर-मंतर पर अपने अनशन की याद दिलाते हुए कहा था कि वह अब कॉकरोचों से मदद चाहते हैं।
वांगचुक की अपील पर अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका ने लद्दाख के समर्थन की बात सोशल मीडिया पर लिखी थी। हालांकि, इनमें से किसी नेता ने ना तो लद्दाख जाने की घोषणा की थी और ना ही इनकार किया था। बाद में वांगचुक ने खराब मौसम को देखते हुए चार दिन की यात्रा स्थगित कर दी और सिर्फ 23 सितंबर को एक दिन की पदयात्रा की घोषणा की। बुधवार को जब कुछ दर्जन यात्रियों के साथ वांगचुक लेह की ओर रवाना हुए तो उनके साथ लद्दाख के अलावा कुछ दूसरे प्रदेशों से आए लोग भी थे। हालांकि, सीजेपी नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास या आशुतोष रांका वहां नजर नहीं आए। पदयात्रा के दौरान एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्होंने एक बार अधिक से अधिक लोगों के आने की अपील की थी, लेकिन बाद में इस पर अधिक जोर नहीं दिया, जो आए उनका स्वागत किया गया है।