1,405 टन का ‘महापुल’! भिवंडी में बुलेट ट्रेन परियोजना ने रचा नया इंजीनियरिंग रिकॉर्ड

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  • 100 मीटर लंबे स्टील ब्रिज की रात में लॉन्चिंग, 1,300 किलोमीटर दूर त्रिची से पहुंची थी विशाल संरचना
  • 54 हजार से अधिक हाई-स्ट्रेंथ बोल्ट से तैयार हुआ ढांचा
    भिवंडी, (ईएमएस)। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर यानी बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण में मुंबई से सटे ठाणे जिले के भिवंडी में 100 मीटर लंबे और करीब 1,405 मीट्रिक टन वजनी स्टील ब्रिज को सफलतापूर्वक लॉन्च कर उसके निर्धारित स्थान पर स्थापित कर दिया गया। मुंबई-नासिक हाईवे के ऊपर दिवे-अंजुर गांव के पास हुई यह लॉन्चिंग परियोजना की जटिल इंजीनियरिंग क्षमता का बड़ा उदाहरण है। यह सिर्फ एक पुल की लॉन्चिंग नहीं थी, बल्कि हजारों टन वजनी स्टील संरचना को व्यस्त हाईवे के ऊपर बेहद सटीक तरीके से स्थापित करने का चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन था। खास बात यह रही कि इस पूरे अभियान को रात में ट्रैफिक ब्लॉक लेकर अंजाम दिया गया, ताकि सड़क यातायात पर इसका असर न्यूनतम रहे।
  • त्रिची में बना, 1,300 किमी दूर पहुंचा
    इस विशाल स्टील ब्रिज का निर्माण महाराष्ट्र में नहीं, बल्कि तमिलनाडु के त्रिची स्थित विशेष वर्कशॉप में किया गया। निर्माण स्थल से करीब 1,300 किलोमीटर का सफर तय कर पुल के हिस्सों को विशेष ट्रेलरों के जरिए महाराष्ट्र लाया गया। भिवंडी पहुंचने के बाद साइट पर पुल के विभिन्न हिस्सों को जोड़ा गया। इसके बाद आधुनिक लॉन्चिंग तकनीक के जरिए पूरी संरचना को हाईवे के ऊपर उसके निर्धारित स्थान तक पहुंचाया गया।
  • रात में चला हजारों टन का ऑपरेशन
    पुल को लॉन्च करने से पहले करीब 100 मीटर लंबी संरचना को जमीन से लगभग 17.5 मीटर की ऊंचाई पर अस्थायी ट्रेस्टल्स पर असेंबल किया गया। इसके बाद पुल को मजबूती देने के लिए 22 स्किड अरेंजमेंट और 54,076 हाई-स्ट्रेंथ बोल्ट लगाए गए। इतनी विशाल संरचना को अंतिम स्थान तक पहुंचाने के लिए 150-150 मीट्रिक टन क्षमता वाले दो हॉलो जैक्स इस्तेमाल किए गए। प्री-टेंशन किए गए मेकेलॉय बार्स और ऑटोमैटिक मैकेनिज्म की मदद से पुल को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया गया। भारी वजन, सीमित जगह और नीचे से गुजरने वाले हाईवे के बीच इस पूरी प्रक्रिया में बेहद सटीक तकनीकी नियंत्रण की जरूरत थी।
  • स्टील की मजबूती से लेकर वेल्डिंग तक कड़ी जांच
    ब्रिज की निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण को भी प्राथमिकता दी गई। स्टील की कटिंग, ड्रिलिंग, वेल्डिंग और पेंटिंग के प्रत्येक चरण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किया गया। स्टील की प्रत्येक उत्पादन बैच की अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग की गई। वेल्डिंग से जुड़े वेल्डरों और सुपरवाइजरों को अंतरराष्ट्रीय वेल्डिंग विशेषज्ञों से प्रमाणित कराया गया। पुल की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए सी-5 प्रोटेक्टिव पेंटिंग सिस्टम और इलास्टोमेरिक बेयरिंग्स का इस्तेमाल किया गया है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मौसम, कंपन और लंबे समय तक होने वाले परिचालन दबाव से संरचना की सुरक्षा करना है।
  • 28 स्टील ब्रिज में 16 का निर्माण पूरा
    मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए कुल 28 स्टील ब्रिज प्रस्तावित हैं, जिनमें 16 का निर्माण पूरा हो चुका है। भिवंडी में 100 मीटर लंबे इस ब्रिज की सफल लॉन्चिंग परियोजना के महाराष्ट्र हिस्से में निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण चरण है। त्रिची से स्टील संरचना का निर्माण, हजारों किलोमीटर की विशेष लॉजिस्टिक्स व्यवस्था, भिवंडी में साइट असेंबली और फिर रात में हाईवे के ऊपर लॉन्चिंग—यह पूरा अभियान बताता है कि बुलेट ट्रेन जैसे हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और सटीक निर्माण तकनीक की कितनी बड़ी भूमिका है। बहरहाल भिवंडी में 1,405 टन के इस स्टील ब्रिज का सफल लॉन्च अब मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण की रफ्तार में एक और अहम अध्याय जोड़ता है।