खड़गे का आरोप: केंद्र ने 12 वर्षों में लोकतंत्र की नींव खोखली की, आयोग कठपुतली

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नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा दें पीएम मोदी
नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाकर कहा कि बीते 12 वर्षों में लोकतंत्र की नींव को जानबूझकर खोखला कर दिया गया है, और चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार की कठपुतली बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी फिर कांग्रेस के कंधों पर है, ठीक उसी तरह जैसे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान थी।
इंदिरा भवन में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजों से हम लोगों ने वोट का अधिकार छीना था, आज उसी अधिकार को बचाने के लिए फिर से लड़ना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि साजिश के तहत लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर के 15 जून 1949 के संविधान सभा में दिए गए बयान के विपरीत है। बाबा साहेब अंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सबसे बुनियादी चीज़ बताकर कहा था कि किसी भी योग्य व्यक्ति को किसी अधिकारी की मर्जी से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे ने कहा कि आज अधिकारी भाजपा और केंद्र सरकार के इशारे पर मनमाने ढंग से नाम काट रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उनके अपने साथी ही भरोसा न करें, उस पर देश कैसे भरोसा कर सकता है? कांग्रेस नेता खड़गे ने सवाल किया कि एसआईआर (सुरक्षित आंतरिक रिपोर्टिंग) का फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया। उन्होंने राजीव गांधी द्वारा युवाओं को अधिकार दिलाने के लिए मताधिकार की उम्र 21 से घटाकर 18 करने का जिक्र कर आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने की योजना बना रही है और चुपचाप फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव किया है, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है।
कांग्रेस नेता खड़गे ने याद दिलाया कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पहले भी महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र जैसे मामलों में मतदाता आंकड़ों के आधार पर फर्जी मतदाताओं, फर्जी पतों और फॉर्म-6 से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग ने तब गंभीरता दिखाई होती, तब आज उसकी विश्वसनीयता बची रहती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिन संस्थाओं को स्वतंत्र और अधिकार संपन्न बनाया, आज वे सत्ता के आगे सिर झुकाए खड़ी हैं और भाजपा-आरएसएस पूरी योजना के तहत लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।
इन गंभीर आरोपों के बीच, कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पांच स्पष्ट मांगें रखीं। इसमें मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें पूरी सूचना और अपील का मौका देना, राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा सरल प्रारूप में समय पर उपलब्ध कराना, जहां गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा में पारदर्शिता शामिल है।
कांग्रेस नेता खड़गे ने लड़ाई को केवल चुनाव जीतने या हारने की बजाय लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले मोदी सरकार ने नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को नेस्तनाबूद किया और अब वोटबंदी की साजिश करके लोकतंत्र को खत्म करने में जुटी है, जिसकी सबसे अधिक मार गरीबों पर पड़ रही है। उन्होंने सीडब्ल्यूसी सदस्यों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि मतदाता सूची पारदर्शी हो, चुनाव निष्पक्ष हों, संस्थाएं स्वतंत्र हों और हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो। उन्होंने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाया जाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए, ताकि पांच राज्यों के आगामी चुनावों में किसी मतदाता का हक न मारा जाए और भारत का भविष्य सुरक्षित रहे।