:: हंसदास मठ में निशुल्क तर्पण अनुष्ठान, 500 से अधिक साधकों ने किया पितरों का स्मरण ::
इंदौर । हंसदास मठ के महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज ने कहा कि वृद्धाश्रम की बढ़ती प्रवृत्ति सनातन संस्कृति के माथे पर कलंक जैसी है। माता-पिता जीवित देवता के समान हैं। उनकी सेवा और सम्मान से नई पीढ़ी को परिवार और संस्कारों से जोड़ने की परंपरा मजबूत होती है।
वे एयरपोर्ट रोड, पीलियाखाल स्थित हंसदास मठ में हंसपीठाधीश्वर श्रीमहंत स्वामी रामचरण दास महाराज के सानिध्य में श्रद्धा सुमन सेवा समिति द्वारा आयोजित निशुल्क तर्पण अनुष्ठान में साधकों को संबोधित कर रहे थे। भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के मार्गदर्शन में हुए अनुष्ठान में 500 से अधिक साधकों ने पितरों का पुण्य स्मरण किया।
महंत पवनदास महाराज ने कहा कि तर्पण दिवंगत परिजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ नई पीढ़ी को पूर्वजों से जोड़ने का माध्यम है। अनुष्ठान में भगवान हरि विष्णु का पूजन और वैदिक मंगलाचरण हुआ। हरि अग्रवाल, राजेंद्र सोनी, महेंद्र विजयवर्गीय, डॉ. चेतन सेठिया और मुरलीधर धामानी सहित समिति पदाधिकारियों ने व्यवस्थाएं संभालीं।
पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने बताया कि 30 सितंबर को चतुर्थी-पंचमी की संयुक्त तिथि होने से दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन होगा। तर्पण के बाद निर्धनों और पशु-पक्षियों के लिए खीर प्रसाद, गौ सेवा और ब्राह्मण सेवा की व्यवस्था भी रहेगी।
:: 10 अक्टूबर तक निशुल्क तर्पण ::
हरि अग्रवाल और राजेंद्र सोनी ने बताया कि 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक निशुल्क तर्पण होगा। 3 से 9 अक्टूबर तक दोपहर 2 से 5 बजे पितृ मोक्षदायी भागवत कथा होगी। कथा पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी करेंगे। कालूराम-श्यामा पटेल दंपती मुख्य यजमान रहेंगे।

