भगीरथपुरा दूषित जल त्रासदी : सिंगार बोले- रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं, दोषियों पर हो एफआईआर

मध्य प्रदेश

:: नेता प्रतिपक्ष ने महापौर के इस्तीफे की मांग की; बोले- 600 पन्नों की रिपोर्ट के बाद भी सरकार मौन ::
इंदौर । भगीरथपुरा दूषित जल त्रासदी की न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने शुक्रवार को सरकार पर निशाना साधा। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग की।
सिंगार ने कहा कि 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट सामने आ चुकी है, लेकिन अब तक जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
:: पाइपलाइनें साथ बिछाने से दूषित हुआ पानी ::
सिंगार ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भगीरथपुरा में पेयजल और सीवरेज पाइपलाइनें साथ-साथ बिछाई गई थीं, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थीं। इससे सीवरेज का पानी पेयजल में मिला। रिपोर्ट में दूषित पानी में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म पाए जाने तथा गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियों का उल्लेख है।
:: 22 मौतें पानी से ‘संभावित रूप से संबंधित’ ::
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को 12 फरवरी तक भगीरथपुरा में 35 मौतों की जानकारी मिली थी। इनमें 22 को आयोग ने दूषित पेयजल की घटना से ‘संभावित रूप से संबंधित’ माना है। स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने इस घटना में 36 मौतों का दावा किया था।
:: 859 दिन की देरी, 66 दिन फाइल लंबित ::
सिंगार ने कहा कि पाइपलाइन परियोजना में टेंडर से काम पूरा होने तक 859 दिन की देरी हुई। उनके अनुसार, इनमें 66 दिन महापौर के स्तर पर फाइल पर हस्ताक्षर नहीं होने के कारण लगे। उन्होंने फाइल लंबित रहने पर सवाल उठाया।
सिंगार ने ठेकेदार को लाभ पहुंचाने और कमीशन से जुड़े आरोप भी लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
:: आयोग को दस्तावेज नहीं देने का आरोप ::
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने न्यायिक आयोग को पेयजल और सीवरेज पाइपलाइनों से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। उन्होंने रिपोर्ट सार्वजनिक करने से बचने तथा कैलाश विजयवर्गीय, पुष्यमित्र भार्गव और कमल बघेल को बचाने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया। इन आरोपों पर सरकार अथवा संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं है।
:: ‘8,500 करोड़ के बजट के बाद भी साफ पानी नहीं’ ::
सिंगार ने नगर निगम के करीब 8,500 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट का हवाला देते हुए पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े बजट के बावजूद इंदौर के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने इंदौर की स्थिति की तुलना छोटे अफ्रीकी गांवों से भी की।
उन्होंने दावा किया कि घटना के महीनों बाद भी नागरिकों और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को साफ पानी की समस्या से पूरी तरह राहत नहीं मिली है।
सिंगार ने कहा कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के बाद सरकार को जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।