सर्वपितृ अमावस्या पर लगाएं पीपल, शमी और बरगद के पौधे, पितरों की शांति के लिए माने जाते हैं शुभ

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नई दिल्ली । पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होने वाला है। हिंदू धर्म में तिथि को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, उनके निमित्त तर्पण और दान करने के लिए विशेष महत्व दिया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों का स्मरण और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यकारी माना जाता है। कुछ मान्यताओं में पीपल, शमी, तुलसी और बरगद जैसे पौधों को पितरों की शांति तथा सुख-समृद्धि से भी जोड़ा गया है। हालांकि, पितृ दोष या आठ पीढ़ियों से चली आ रही परेशानियों को पौधे लगाने से दूर करने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
धार्मिक परंपराओं में पीपल का पौधा विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। सर्वपितृ अमावस्या पर मंदिर या किसी उपयुक्त स्थान पर पीपल का पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने को शुभ माना जाता है। पौधा लगाने से पहले स्थानीय नियमों और उसके लिए पर्याप्त जगह का ध्यान रखना चाहिए। शमी और तुलसी के पौधे भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। शमी को भगवान शिव और शनिदेव से जोड़ा जाता है, जबकि तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। मान्यता के अनुसार, घर में तुलसी की नियमित पूजा और शमी की देखभाल से सकारात्मकता तथा सुख-शांति का वातावरण बनता है। इन्हें आंगन या बालकनी में भी लगाया जा सकता है। बरगद का पौधा दीर्घायु, स्थिरता और निरंतरता का प्रतीक होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर इसका पौधरोपण करना पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक तरीका है। बरगद बड़ा वृक्ष बनता है, इसलिए इस खुले स्थान पर लगाना उचित रहता है। इस दिन पौधरोपण के साथ पितरों का स्मरण, जरूरतमंदों को भोजन कराना और सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी परंपरा का हिस्सा है। इन कार्यों को श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण की भावना के साथ किया जा सकता है।