शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर हमला

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शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर हमला, बोले कांग्रेस अपनी चुनावी हार का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ रही है, जबकि असली कारण उसका विचार-शून्य नेतृत्व है

-कांग्रेस के नेता इसे शिव जी की बारात बता रहे हैं, जबकि यह शिव जी की बारात नहीं, बल्कि सड़कों पर अराजकता फैलाने वाले हुड़दंगियों की जमात है।
-कांग्रेस और इंडी गठबंधन अब विदेशी ताकतों के हाथों का खिलौना बन चुका है।
नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया और कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने और अपनी चुनावी हार का दोष दूसरों पर मढ़ने का आरोप लगाया। श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस की हार का कारण उसका नेतृत्व, आंतरिक कलह और जनसमर्थन में कमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न्यायालय, चुनाव आयोग और सेना पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह करती है तथा विदेशी ताकतों का सहारा लेती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस जनता की नजरों में पहले ही गिर चुकी है और आगे उसका पूरा सफाया सुनिश्चित है।
श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस पिछले कई वर्षों से लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रही है। हद तो यह हो गई है कि पार्टी अपनी चुनावी हार का दोष भी संवैधानिक संस्थाओं पर मढ़ती है। कांग्रेस की हार का सिलसिला लगातार जारी है। हाल ही में हुए उपचुनावों में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। असम में कांग्रेस की स्थिति क्या है, यह भी सबने देखा है। त्रिपुरा और राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में तथा उससे पहले हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस को चुनावी हार का सामना करना पड़ा। एक के बाद एक चुनाव हारना और उस खीझ को आंदोलन करके सड़कों पर निकालना कांग्रेस की नियति बन गई है। कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि स्वयं कांग्रेस का विचार-शून्य नेतृत्व है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि आज कांग्रेस की हालत यह है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी के भीतर जूतम-पैजार हो रही है। पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलना पड़ा है। अलग-अलग जगहों पर नेतृत्व को लेकर झगड़े चल रहे हैं। कर्नाटक में कभी सिद्धारमैया तो कभी डी. के. शिवकुमार के बीच खींचतान देखने को मिलती है। तेलंगाना में भी जूतम-पैजार चल रही है। कांग्रेस की हार का कारण कोई और नहीं, बल्कि उसका अपना नेतृत्व है। जो देश को नहीं जानता, देश की जनता को नहीं जानता, यहाँ के जीवन मूल्यों और परंपराओं को नहीं जानता, वह संविधान की क्या बात करेगा। कांग्रेस नेतृत्व की हालत ऐसी हो गई है कि उस पर यह कहावत सटीक बैठती है -“नाच न जाने, आंगन टेढ़ा।” कांग्रेस संविधान की क्या बात करेगी, जिस कांग्रेस ने 90 से ज्यादा बार चुनी हुई सरकारों को बदलने का पाप किया हो, जो पार्टी कपड़ों की तरह मुख्यमंत्री बदलती थी, देश में लोकतंत्र का गला घोंटकर आपातकाल लगाया, वह कांग्रेस संविधान की क्या बात करेगा।
श्री चौहान ने कहा कि आज कांग्रेस की हालत यह है कि देश के कई प्रमुख राज्यों में उसका काफी पहले सफाया हो चुका है। तमिलनाडु में लगभग 59 वर्षों से, पश्चिम बंगाल में लगभग 49 वर्षों से, सिक्किम में 42 वर्षों से, उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से, बिहार में 36 वर्षों से, त्रिपुरा में 33 वर्षों से, गुजरात में 31 वर्षों से, ओडिशा में 26 वर्षों से, नागालैंड में 23 वर्षों से, गोवा में 15 वर्षों से और दिल्ली में 13 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। पूरा हिसाब देखें, तो कांग्रेस कहीं बची नहीं है और तीन-चार राज्यों को छोड़ दें, तो कांग्रेस दूसरे राज्यों में भी केवल जूनियर पार्टी बनकर रह गई है। तमिलनाडु में कांग्रेस डीएमके के सहारे है, लेकिन अब वह सहारा भी खिसक रहा है। बिहार में भ्रष्ट आरजेडी के सहारे, उत्तर प्रदेश में कभी सपा तो कभी बसपा के सहारे और झारखंड में झामुमो तथा जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सहारे कांग्रेस राजनीति कर रही है। कांग्रेस अब एक जूनियर पार्टनर और परजीवी पार्टी बनकर रह गई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस कुर्सी के लिए अब संवैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रही है, क्योंकि वह जनता का दिल नहीं जीत सकती। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की जनता के दिलों पर राज करते हैं। इसलिए, जब वे ‘विकसित भारत’ के निर्माण के महायज्ञ में देशवासियों का आह्वान करते हुए कहते हैं, “वी विल डू इट”, तो पूरा देश भी उनके साथ यही संकल्प दोहराता है। हताश और परेशान कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर, सड़कों पर अराजकता और दंगे फैलाकर तथा झूठ बोलकर जनता को गुमराह करके सत्ता में वापसी चाहती है। कांग्रेस की हालत यह है कि जब न्यायालय का फैसला उसके पक्ष में नहीं आता, तो वह न्यायालय पर हमले करती है। चुनाव हारती है, तो चुनाव आयोग पर हमले करती है। जब सेना आतंकवादियों को ठिकाने लगाती है, तो कांग्रेस सेना पर हमले करती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस अब देश को तोड़ने वाली ताकतों के साथ हाथ मिला रही है। कांग्रेस के नेता कह रहे थे कि कांग्रेस तो शिव जी की बारात है। श्रीराम का विरोध करने वाले शिव जी की बारात की बात कर रहे हैं, लेकिन यह शिव जी की बारात नहीं, बल्कि अराजकता फैलाने वाले हुड़दंगियों की जमात है, जो सड़कों पर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन अब विदेशी ताकतों के हाथों का खिलौना बन चुके हैं। सत्ता पाने के लिए वे कभी वामपंथियों, कभी कॉकरोचों, कभी जॉर्ज सोरोस जैसी देशविरोधी ताकतों का सहारा लेती है।
श्री चौहान ने कहा कि मार्च 2023 में लंदन में राहुल गांधी ने विदेशी ताकतों से भारत के आंतरिक मामलों और लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने की बात कही थी। कांग्रेस आखिर किसके सहारे राजनीति करेगी? क्या वह विदेशी ताकतों के हाथों का खिलौना बनकर रह जाएगी? जनवरी 2025 में, कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान भी राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा था कि उनकी लड़ाई केवल भारतीय जनता पार्टी से नहीं, बल्कि ‘इंडियन स्टेट’ से है। राहुल गांधी इसका जवाब दें कि आखिर यह क्या है? यह दर्शाता है कि राहुल गांधी और कांग्रेस किस हद तक गिर चुके हैं। कांग्रेस सड़कों पर कितनी भी अराजकता फैलाने की कोशिश कर ले, उसे सफलता नहीं मिलेगी। कांग्रेस जनता की नजरों में पहले ही गिर चुकी है और आगे उसका पूरा सफाया हो जाएगा।