सेमीकंडक्टर सेक्टर में प्रदेश के लिए खुलेंगे नए रास्ते, एआई से तेज होगा चिप डिजाइन

इंदौर

समिट के दूसरे दिन 5 पैनलों में मंथन; स्वदेशी तकनीक, निवेश और कौशल विकास पर जोर, डिजाइन-विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत ::
इंदौर । सेमीकंडक्टर उद्योग में मध्यप्रदेश की संभावनाओं को निवेश और रोजगार में बदलने के लिए स्वदेशी तकनीक, कुशल मानव संसाधन और मजबूत औद्योगिक आधार विकसित करने पर जोर दिया गया। मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 के दूसरे दिन शनिवार को पांच पैनल चर्चाओं में विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों और शासन के प्रतिनिधियों ने चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और कौशल विकास पर विचार साझा किए। चर्चाओं में असेंबली से आगे बढ़कर चिप डिजाइन, अनुसंधान और स्वदेशी विनिर्माण क्षमता मजबूत करने की जरूरत रेखांकित की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय समिट का शुभारंभ किया था। दूसरे दिन प्रदेश की अधोसंरचना, कनेक्टिविटी, शैक्षणिक संस्थानों और प्रतिभाओं को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
:: एआई से तेज और प्रभावी होगा चिप डिजाइन ::
पहले पैनल में विशेषज्ञों ने कहा कि एआई चिप डिजाइन की प्रक्रिया को तेज, प्रभावी और स्वचालित बनाने में मदद कर सकता है। इसके लिए कंप्यूटिंग क्षमता, मेमोरी, डेटा ट्रांसफर और सॉफ्टवेयर का बेहतर समन्वय जरूरी है। इंटेल के वरिष्ठ प्रधान अभियंता अर्पण सिरकर ने इन तकनीकी पहलुओं के महत्व को रेखांकित किया। विशेषज्ञों ने जटिल चिप्स के डिजाइन में एआई के उपयोग के साथ तकनीकी सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
एमपीएसईडीसी के प्रबंध निदेशक अंशुमन राज ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के पूरक के रूप में सेमीकंडक्टर नीति लागू की है। उन्होंने निवेशकों को आवश्यक सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
:: स्वदेशी उत्पाद और विनिर्माण पर जोर ::
दूसरे पैनल में भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का प्रमुख केंद्र बनाने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए स्वदेशी ब्रांड, चिप डिजाइन, बौद्धिक संपदा और विनिर्माण क्षमता का विस्तार जरूरी है। सैक-इसरो के वैज्ञानिक हरिशंकर गुप्ता ने शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया। स्वदेश आईसी के मुख्य व्यवसाय अधिकारी चंदर पाल ने स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण को महत्वपूर्ण बताया।
:: जीसीसी और डिजाइन सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं ::
तीसरे पैनल में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और डिजाइन सेवाओं के विस्तार पर मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने कुशल प्रतिभाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और मजबूत अधोसंरचना को कंपनियों के विस्तार के लिए जरूरी बताया। क्वेस्ट ग्लोबल की उपाध्यक्ष सुमेधा लिमये ने प्रतिभाओं की उपलब्धता के साथ उनकी प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया। एमएसएमई विभाग के सचिव जॉन किंग्सले ने प्रदेश के औद्योगिक आधार, शैक्षणिक संस्थानों और प्रतिभाओं को इस क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल बताया।
:: नीतिगत समन्वय और कौशल विकास पर फोकस ::
चौथे पैनल में निवेश प्रोत्साहन, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, आपूर्ति शृंखला, वित्तीय प्रबंधन और पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने केंद्र और राज्यों की नीतियों में तालमेल के साथ स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने तथा उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।
पांचवें पैनल में चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक के लिए प्रतिभा विकास एवं अनुसंधान पर चर्चा हुई। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर योगेश चौहान ने उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग की जरूरत बताई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बुनियादी तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।
:: निवेश और रोजगार में बदलनी होंगी संभावनाएं ::
पांचों पैनलों की चर्चाओं में स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान, निवेश, कौशल विकास और नीतिगत सहयोग को सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार का आधार बताया गया। मध्यप्रदेश के लिए इन संभावनाओं को वास्तविक निवेश, स्थानीय आपूर्ति शृंखला, विनिर्माण और रोजगार के अवसरों में बदलना महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण और तकनीकी संस्थानों के साथ साझेदारी पर जोर दिया गया।