वनश्री मॉडल से आदिवासी महिलाओं की आर्थिक उड़ान

देश-विदेश
  • गुजरात के व्यारा में चार वनश्री रेस्टोरेंट का सालाना कारोबार रु. 1 करोड़ पार
  • 50 से अधिक महिलाओं को रोजगार और 100 परिवारों को आजीविका का संबल
    गांधीनगर | गुजरात के व्यारा वन विभाग द्वारा लागू किया गया ‘वनश्री मॉडल’ आदिवासी क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और पर्यटन आधारित रोजगार का सफल उदाहरण बन रहा है। वन पर्यटन को स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़कर विकसित किए गए इस मॉडल अंतर्गत चार वनश्री रेस्टोरेंट कार्यरत हैं, जिनका संयुक्त वार्षिक टर्नओवर 1 करोड़ रुपए से अधिक है। इस पहल से 50 से अधिक स्थानीय महिलाएँ सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं, जबकि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के माध्यम से लगभग 100 परिवारों को लाभ मिल रहा है।
    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन तथा वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य वन मंत्री प्रवीण माळी के नेतृत्व में वन, मानव और समृद्धि को जोड़ने वाले इस अनूठे मॉडल के माध्यम से आज आदिवासी महिलाएँ मजदूरी से मुक्त होकर स्थानीय अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में उद्यमी के रूप में उभरकर आई हैं।
    सूरत वन वृत्त के वन संरक्षक पुनीत नैय्यर (आईएफएस) ने कहा, “सूरत वन वृत्त अंतर्गत आने वाले व्यारा वन विभाग में कार्यरत चार ‘वनश्री’ रेस्टोरेंट का संचालन स्थानीय महिला स्वयं-सहायता समूह करते हैं। इन रेस्टोरेंट में आने वाले पर्यटकों को नागली (रागी) की रोटी, परंपरागत दालें, नागली के लड्डू सहित स्थानीय व्यंजन परोसे जाते हैं। ये रेस्टोरेंट आदिवासी समुदाय के परंपरागत व्यंजनों को प्रोत्साहन देते हैं और स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर भी प्रदान करते हैं।”
    व्यारा वन विभाग के उप वन संरक्षक सचिन गुप्ता (आईएफएस) ने कहा, “‘वनश्री’ मॉडल आदिवासी महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रतीक बन गया है। यहाँ उन्हें रोजगार के साथ-साथ बिजनेस लीडर बनने का प्रशिक्षण भी मिलता है। जो महिलाएँ कभी मजदूरी करती थीं, वे अब स्वतंत्र रूप से व्यावसायिक मॉडल चला रही हैं। आज स्वयं-सहायता समूहों यानी सखी मंडलों के माध्यम से ये महिलाएँ अपने रेस्टोरेंट और कारोबार का सफल संचालन कर रही हैं। इस मॉडल ने उनके जीवन में स्थिरता, आत्मसम्मान और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की है।”
    वित्तीय सुरक्षा एवं सम्मान के साथ स्थिर मासिक आय मिलने से आदिवासी परिवार अपने बच्चों को उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने के लिए भेज रहे हैं। इतना ही नहीं, वित्तीय आत्मनिर्भरता के कारण चिकित्सा संबंधी इमर्जेंसी के समय दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और परिवारों के लिए समय पर उपचार संभव हो पाया है। इन रेस्टोरेंट के साथ-साथ ये महिलाएँ स्थानीय कृषि उत्पादों की बिक्री भी करती हैं और आय अर्जित करती हैं।
  • प्रतिक्रिया
    करंजवेल गाँव के ‘हेतवी सखी मंडल’ की एक सदस्य अपने अनुभव के बारे में कहती हैं, “वनश्री से पहले हमारी कोई निश्चित आय नहीं थी। आज मैं पूरा रेस्टोरेंट चलाती हूँ और अपने कर्मचारियों को वेतन देती हूँ। यही वास्तविक बदलाव है।”
  • महिलाओं द्वारा संचालित चार ‘वनश्री रेस्टोरेंट’ का सफल प्रभाव
    व्यारा वन विभाग में फैले चार वनश्री रेस्टोरेंट पर्यटकों को परंपरागत आदिवासी व्यंजन परोसते हैं और स्थानीय महिला सखी मंडलों के लिए स्थायी आय के अवसर पैदा करते हैं।
  • चार वनश्री रेस्टोरेंट के बारे में
  1. व्यारा वनश्री : करंजवेल गाँव का ‘हेतवी सखी मंडल’ इस केन्द्र का संचालन करता है। ग्रामीण महिलाओं का यह समूह शहरी फूड एंटरप्राइज चलाता है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों आगंतुकों को नागली की रोटी, पारंपरिक दालें, नागली के लड्डू और स्थानीय व्यंजन परोसे जाते हैं। इसका वार्षिक कारोबार 53 लाख रुपए है।
  2. वनश्री, सोनगढ : चीकलदा गाँव का ‘आदर्श महिला मंडल’ इसे चलाता है। सुनीता गामित द्वारा 15 स्थानीय महिला कार्यकर्ताओं के साथ शुरू हुआ यह केन्द्र अर्ध-शहरी क्षेत्र में महिला सामूहिक उद्यम का उत्कृष्ट मॉडल बन गया है। इस उद्यम का वार्षिक टर्नओवर 30 लाख रुपए है।
  3. वनश्री, पदमडुंगरी : चूनावाडी का ‘साई सखी मंडल’ यह केन्द्र संभालता है। इको-टूरिस्ट्स तथा प्रकृतिप्रेमियों के लिए यह सबसे लोकप्रिय केंन्द्र है, जहाँ लोग जंगल के अनुभव के साथ स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते हैं। इसका वार्षिक टर्नओवर लगभग 10 लाख रुपए है।
  4. वनश्री, आंबापानी : ‘प्रगति सखी मंडल’ द्वारा संचालित यह उद्यम दूरस्थ वन क्षेत्र में आदिवासी उत्पादकों को आगंतुकों से जोड़कर स्थानीय फूड इकोनॉमी विकसित कर रहा है। इसका वार्षिक टर्नओवर 8 लाख रुपए है।
  • आँकड़ों पर एक नजर
    1 करोड़ से रुपए अधिक : अनुमानित वार्षिक टर्नओवर।
    50 से अधिक : आदिवासी महिलाएँ सीधे रोजगार से जुड़ी हुई हैं।
    लगभग 100 परिवार : प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आजीविका के माध्यम से सकारात्मक रूप से प्रभावित हुए हैं।
  • संपूर्ण सामूहिक मूल्य श्रृंखला
  1. स्थानीय उत्पादन : आदिवासी खेतों से ताजी सामग्री प्राप्त करना।
  2. आदिवासी उद्यम : महिला सखी मंडलों द्वारा प्रसंस्करण, खाना पकाने और आपूर्ति का प्रबंधन।
  3. पारंपरिक व्यंजन : आगंतुकों को असली नागली की रोटी, दालें और लड्डू परोसना।
  4. इको-टूरिज्म : पर्यटक आदिवासी संस्कृति का अनुभव करते हैं और स्थानीय उत्पाद अपने साथ घर ले जाते हैं।
  • वन पर्यटन के साथ स्थानीय संस्कृति का संवर्धन
    वनश्री मॉडल स्थानीय कृषि उत्पादों से लेकर पारंपरिक भोजन, महिला संचालित उद्यमों और वन पर्यटन को एक ही व्यवस्था के साथ जोड़ता है। पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति एवं पारंपरिक व्यंजनों का अनुभव मिलता है, जबकि स्थानीय समुदाय को आय और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होते हैं।
    यह मॉडल दर्शाता है कि यदि आदिवासी महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, बाजार और व्यवसाय संचालन के अवसर दिए जाएँ, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समग्र समुदाय के विकास में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। इस प्रकार; वनश्री पहल महिला सशक्तीकरण, आदिवासी उत्पादों को प्रोत्साहन और वन आधारित टिकाऊ आजीविका को जोड़ने वाला एक उल्लेखनीय उदाहरण बन रही है।