-उज्जैन के अस्पताल में भर्ती होने का दिया था हवाला, राजस्थान सरकार को स्वास्थ्य का ध्यान रखने का निर्देश
नई दिल्ली । नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने चिकित्सा आधार पर उनकी पैरोल बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। आसाराम के वकील ने दलील दी थी कि वह मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें उपचार के लिए अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने पैरोल बढ़ाने से इनकार करते हुए राजस्थान सरकार को उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने का निर्देश दिया।
आसाराम को पैरोल की अवधि समाप्त होने पर निर्धारित समय तक जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करना है। जानकारी अनुसार, उनकी 20 दिन की पैरोल 27 अक्टूबर को शाम पांच बजे समाप्त हो रही है, ऐसे में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चिकित्सा आधार पर पैरोल की अवधि बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद आसाराम मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंचे थे। वहां उनके पंचकर्म उपचार की योजना थी। इसी दौरान उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके वकील ने इसी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का हवाला देते हुए पैरोल बढ़ाने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल बढ़ाने से इनकार करने के साथ राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि आसाराम की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ध्यान रखा जाए। इस तरह अदालत ने चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने की बात कही, लेकिन जेल से बाहर रहने की अवधि बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
नाबालिग से दुष्कर्म की सजा काट रहे आसाराम
आसाराम राजस्थान में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें चिकित्सा आधार पर 20 दिन की पैरोल देने की अनुमति दी थी। हालांकि, गुजरात में एक अन्य दुष्कर्म मामले में सजा के कारण उनकी रिहाई की प्रक्रिया में अड़चन आई थी। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर को राज्य सरकार को पैरोल संबंधी आदेश का पालन करने का निर्देश दिया था। पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद अब आसाराम को जेल लौटना होगा।

