नर्मदा के आंचल में विदेशी परिंदों का डेरा, गौरीघाट पर बढ़ी रौनक

मध्य प्रदेश

साइबेरिया सहित ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे प्रवासी पक्षी
जबलपुर । सर्दियों की दस्तक के साथ ही संस्कारधानी में विदेशी मेहमानों की आमद शुरू हो गई है। नर्मदा के तट, खासकर गौरीघाट, इन दिनों प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी से गुलजार हैं। साइबेरिया सहित अन्य ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर पहुंचे इन परिंदों की जलक्रीड़ा और आसमान में अठखेलियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं। सुबह और शाम के समय इन खूबसूरत पक्षियों को निहारने के लिए शहरवासी और सैलानी घाटों पर पहुंच रहे हैं।
प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स के अनुसार, अक्टूबर की शुरुआत से ही प्रवासी पक्षियों का जबलपुर पहुंचना शुरू हो जाता है। ठंड और भोजन की तलाश में ये पक्षी भारत का रुख करते हैं। मौसम में बदलाव आने तक, आमतौर पर मार्च-अप्रैल तक, वे यहां के जलस्रोतों और आसपास के अनुकूल क्षेत्रों में रहते हैं। इसके बाद अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं।
पक्षियों के लिए अनुकूल है जबलपुर का पर्यावरण…………
बर्ड वॉचर जगत फ्लोरा के मुताबिक, जबलपुर और आसपास का पर्यावरण पक्षियों के लिए अनुकूल है। उनके अनुसार, शहर के आसपास करीब 400 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिनमें 100 से अधिक प्रजातियां विदेशी मेहमानों की हैं। इन प्रवासी पक्षियों की खास बात यह है कि वे सर्दियों में अनुकूल वातावरण और भोजन की उपलब्धता के कारण यहां आते हैं, जबकि उनका प्रजनन सामान्यतः अपने मूल देशों में ही होता है। नर्मदा के तटों पर पक्षियों की मौजूदगी न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता को करीब से देखने का अवसर भी देती है। गौरीघाट पर सुबह-शाम जुटने वाले लोग इन पक्षियों की गतिविधियों को देखकर रोमांचित हो रहे हैं।
पक्षियों को न खिलाएं नमकीन-बिस्कुट……….
प्रवासी पक्षियों को देखने पहुंचने वाले कई लोग उत्साह में उन्हें नमकीन, बिस्कुट, सेव, आटा और अन्य पैकेटबंद खाद्य सामग्री खिलाने लगते हैं। हालांकि, ऐसा करना पक्षियों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। मनुष्यों के लिए तैयार नमकीन और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ उनके प्राकृतिक आहार का विकल्प नहीं हैं।
पक्षियों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि उन्हें अनुकूल प्राकृतिक वातावरण में रहने दिया जाए और उनकी गतिविधियों में अनावश्यक हस्तक्षेप न किया जाए। नर्मदा तट पर आने वाले लोग भी इस बात का ध्यान रखें कि उनकी छोटी-सी सावधानी इन खूबसूरत मेहमानों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाए रखने में मददगार हो सकती है।