सजना के लिए सजने बाजारों में जमकर खरीददारी
जबलपुर । पति की दीर्घायु की कामना के लिए सुहागिन महिलाएं आज करवा चौथ का निर्जला व्रत रखेंगी और शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का समापन करेंगी। करवा चौथ का व्रत पिछले कुछ वर्षो से बड़े उत्साह और आधुनिकता के साथ इस दिन महिलाएं और युवतियां पूरे साजो श्रंगार के साथ अपने सजना के लिए सजती है। करवा चौथ की पूर्व संध्या पर बाजारों में काफी चहल पहल रही। नई नई साड़ियों के साथ लहंगा चूड़ी बिंदी आदि सौंदर्य प्रसाधन की जमकर खरीदारी हुई। दूसरी ओर पूजन समाग्री के लिए करवा और धान की बाली आदि की जमकर बिक्री हुई। ज्योतिष शास्त्रीयों के मुताबिक करवा चौथ के दिन गुरुवार को चंद्रमा रात 08.15 बजे नजर आएगा। यह पर्व पति की दीर्घायु एवं परिवार की सुख समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है।
पंडित पीएल गौतमाचार्य के मुताबिक यह व्रत दाम्पत्य जीवन में मनमुटाव को दूर करने के साथ चंद्रमा के प्रभाव से मन को शीतलता भी प्रदान करता है। करवा चौथ के व्रत में मिट्टी से बने करवा में पूजन सामग्री रखकर भगवान चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान भोले शंकर जी के पूजन का विधान है। करवा चौथ कार्तिक मास की चतुर्थी को होता है। इस दिन करवे की पूजा की जाती है। यह पर्व पार्वती देवी की आराधना का पर्व है। माता पार्वती जी को स्त्रियों के अक्षत सुहाग का प्रतीक माना गया है। पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक माता सीता ने भी मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम को पति के रूप में प्राप्त करने के बाद माता पार्वती की आराधना करते हुए सर्वप्रथम कार्तिक चतुर्थी का व्रत किया था।
पूजन विधि….
करवा चौथ के दिन व्रत रखें और एक पटे पर जल से भरा लोटा रखें। मिट्टी के एक करवे में गेहूं और ढक्कन में चांवल, गुड़ आदि से गणपति की पूजा करें। रोली से करवे पर स्वास्तिक बनाएं और 13 बिंदियां रखें। स्वयं भी बिंदी लगाएं और गेहूं के 13 दाने दांए हाथ में लेकर कथा सुने। कथा सुनने के बाद अपनी सासूजी के चरण स्पर्श करें और करवा उन्हें दे दे। पानी का लोटा और गेहूं के दाने अलग-अलग रख लें। रात्रि में चंद्रोदय होने पर पानी में गेहूं के दाने डालकर उसे अर्घ्य दें फिर भोजन करें। यदि कहानी पंडिताइन से सुनी हो तो गेहूं, चीनी और पैसे उसे दे दे। यदि बहन बेटी हो तो गेहूं चीनी व पैसे उसे दे दे।

