भारत-यूरोपीय संघ के बीच एफटीए दिसंबर में होगा पक्का

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-ब्रसेल्स का दौरा करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली । भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने औपचारिक घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दिसंबर में बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स का दौरा करेंगे, जहां इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। 27 देशों के विशाल और विकसित यूरोपीय बाजार की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 23 लाख करोड़ डॉलर है। इस व्यापार समझौते के लागू होने से भारत के अधिकांश उत्पाद ईयू के बाजार में पूरी तरह ड्यूटी-फ्री हो जाएंगे, जिससे दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार को अभूतपूर्व गति मिलेगी। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.54 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है।
कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एंटोनियो कोस्टा ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर में समझौते को अंतिम रूप देने ब्रसेल्स पहुंचेंगे। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री 17 दिसंबर से शुरू होने वाली यूरोपीय नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक से ठीक पहले यह दौरा कर सकते हैं। इस साल जनवरी में ही भारत-ईयू ट्रेड डील पर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई थी। इस महत्वाकांक्षी समझौते की नींव मूल रूप से वर्ष 2007 में रखी गई थी, लेकिन विभिन्न शर्तों और प्राथमिकताओं में मतभेदों के चलते साल 2013 में बातचीत पूरी तरह ठप हो गई थी। इसके बाद 8 मई 2021 को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस वार्ता को नए सिरे से जीवनदान दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप मुक्त व्यापार समझौते के साथ-साथ निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेतक (जीआई) से जुड़े अहम मुद्दों पर भी सहमति बन गई। इस व्यापक समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को पूरी तरह समाप्त कर दोनों पक्षों के कारोबारियों के लिए बाजार की राह को बेहद सुगम बनाना है। इस डील के तहत भारत को अपने कुल निर्यात मूल्य के 99 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर यूरोपीय बाजार में शून्य या रियायती शुल्क का सीधा और बड़ा लाभ मिलेगा, जिसका सबसे अधिक फायदा कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण जैसे प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पहुंचेगा। वहीं, यूरोपीय संघ से भारत आने वाले सामानों पर भी आयात शुल्क में कटौती की जाएगी, जिसमें ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में टैरिफ में कमी चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।