-रिपोर्ट : छात्र अब ज्यादा व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख के निर्णय ले रहे हैं
नई दिल्ली । विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सोच रखने वाले भारतीय छात्रों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है। अब भारतीय युवा सिर्फ किसी विदेशी डिग्री के लिए विदेश का रुख नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका मुख्य ध्यान पढ़ाई के बाद मिलने वाले रोजगार के अवसरों, एआई जैसे तकनीकी कौशल और भविष्य की अनिश्चितताओं से बचने के लिए कई देशों के बैकअप विकल्पों पर केंद्रित है। एक रिपोर्ट के मुताबिक छात्र अब ज्यादा व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख निर्णय ले रहे हैं। यह रिपोर्ट दुनिया के 106 देशों और क्षेत्रों के 4,800 से ज्यादा छात्रों पर किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसमें भारतीय छात्रों की भागीदारी सबसे ज्यादा रही।
इस सर्वेक्षण के नतीजे दिखाते हैं कि भारतीय छात्र अब केवल देश या विश्वविद्यालय के नाम पर विदेश नहीं जा रहे हैं, बल्कि वे अपने करियर के दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका मानना है कि यह उनके जीवन का एक बड़ा फैसला है, और इसलिए वे इसे पूरी तरह से भविष्य को ध्यान में रखकर ले रहे हैं। जानकारों के मुताबिक यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि जहां वैश्विक स्तर पर अधिकांश छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का निर्णय लेते समय सबसे बड़ा मुद्दा वहां रहने का खर्च होता है, वहीं भारतीय छात्रों के लिए तस्वीर बिल्कुल अलग है।
रिपोर्ट बताती है कि 22 फीसदी भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा कारक पढ़ाई पूरी होने के बाद पोस्ट-स्टडी वर्क अपॉर्चुनिटी यानी काम करने के कितने मौके मिलेंगे, यह होता है। तकनीकी प्रगति के इस युग में, भारतीय युवा काफी दूरदर्शी सोच का प्रदर्शन कर रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल 47 फीसदी भारतीय छात्रों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की नौकरियों में सफलता पाने के लिए एआई और अन्य तकनीकी कौशल बहुत जरुरी हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय छात्र उन पाठ्यक्रमों और देशों को चुनने के इच्छुक हैं जो उन्हें नवीनतम तकनीक और एआई-सक्षम कौशल में पारंगत कर सकें।
वीजा नियमों में बदलाव और अप्रवासन नीतियों में अनिश्चितता, जो कि कई लोकप्रिय अध्ययन स्थलों जैसे कनाडा, यूके या ऑस्ट्रेलिया में देखी जा रही है, से बचने के लिए भारतीय छात्रों ने एक नई रणनीति अपनाई है। रिपोर्ट के मुताबिक 74 फीसदी संभावित भारतीय छात्र अब एक साथ कई देशों के अध्ययन विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। यह कदम यह तय करने के लिए उठाया जा रहा है कि यदि किसी एक देश के नियम सख्त होते हैं, तो उनका बहुमूल्य वर्ष और शैक्षिक भविष्य खतरे में न पड़े।

