हम मध्यम वर्गीय परिवार की लड़कियां
नहीं भर सकती ऊचाईयों तक उड़ान अपनी
इनके कांधे का वजह भारी होता है
क्यूंकि इन्हें लेकर चलना पड़ता है
लड़की होने की मर्यादा
रिश्तों और समाज के तानों बानों का बोझ
मगर हारती नहीं निरंतर जारी रखती हैं प्रयास
ताकि रच सके नया इतिहास
रोटियों के जगह बनाती हैं मानचित्र समाज की
और सेंक देती हैं तवे पर
क्यूंकि उन्हें पता है जबतक तानों और
भेदभाव की बेड़ियों में जकड़ी रहेंगी
हासिल ना कर सकेंगी मन्ज़िल अपनी
तो सुनो लड़कियो, उठो और
अपनी यात्रा का शुभारंभ करो
ताकि आसमां से ऊंची उड़ान हो तुम्हारी।
नेहा यादव
लखनऊ उत्तरप्रदेश