एक ताज़ा ग़ज़ल

FEATURED

वही तन बदन मन सभी कुछ वही है।
तुम्हे  देखकर  मिल  रही  ताज़गी  है।

भरोसा  करूँ ये  बताओ  मैं किस पर,
हर इक आदमी जब यहाँ अजनबी है।

तेरे  बिन  लगे थी  ये  बेकार  अजहद,
तेरे   साथ   गुज़री  वही   ज़िन्दगी  है।

मुझे दे  रही हर  क़दम  दिलकशी  वो,
तुम्हारे लिये जो  फ़क़त इक  गली है।

नबदला थाकलकुछ नबदला हैैअबकुछ,
नज़र जिस  तरफ भी  गई  धाँधली  है।

मुझे लग  रहा यार  आमद  है  उनकी,
बड़ी  दूर  से   दिख   रही  रौशनी  है।

अगर बह रही है तो बहने  दो उसको,
उसे  रोकना   मत   पहाड़ी   नदी  है।

हमीद कानपुरी
अब्दुल हमीद इदरीसी
179 , मीरपुर, कैण्ट,कानपुर- 208004
वरिष्ठ प्रबन्धक, सेवानिवृत,
पंजाब नेशनल बैंक,
मण्डल कार्यालय ,बिरहाना रोड ,कानपुर-208001
9795772415

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