इन्दौर । साहित्यिक संस्था वामा साहित्य मंच ने मासिक संगोष्ठी का आयोजन किया। इसके अन्तर्गत तात्कालिक सम्भाषण प्रतियोगिता आयोजित हुई। सदस्यों ने पर्ची उठाकर विषय का चुनाव किया। दिए गए विषय सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए थे, जिसमें वक्ताओं ने कुरीतियों को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया। साथ ही सामाजिक सरोकार के मुद्दों पर बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
संचालिका निधि जैन ने बताया कि मस्तिष्क विभिन्न भावनाओं को अलग- अलग जगह पर जमा करके रखता है। यहीं कारण है कि क्रोध के समय कोई खुशी की बात नहीं याद आती| अतिथि स्नेहलता ने कहा तात्कालिक भाषण के लिये चित्त की एकाग्रता बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही बताया कि प्रत्युत्पन्नमति भी एक महत्वपूर्ण घटक होता है। वहीं दूसरी अतिथि रीनू शर्मा ने महाभारत और गीता के उद्धरण के द्वारा अपनी बात रखी। सुषमा चौधरी ,सरला मेहता ,गायत्री मेहता ,शीला श्रीवास्तव,हंसा मेहता ,माधवी जैन ,रूपाली पाटनी,शांता पारेख, वैजयंती दाते, विद्या पाराशर, शोभना नाइक, नीलम तोलानी, मंजु मिश्रा, कोमल रामचंदानी,आशा गर्ग, भावना दामले आदि ने प्रतिभाग लिया। सुषमा चौधरी ने अपने विषय “अपना- अपना सूर्यास्त” में कहा कि जब तक हौसला है; हमारा सूर्य जवान है। सूर्यास्त मन की भावना है,मन में उमंग बनाये रखें।
रुपाली पाटनी ने अपने विषय “शक्ति” को विस्तार देते हुए कहा कि अपनी शक्तियों को पहचानें व उन्हें पुष्ट कर सफलता को अपना बनाएं । किसलय पंचोली ने विषय “काया” पर कहा कि स्वयं को सिर्फ काया के विचारों तक सीमित न रखें। इसमें मौजूद आत्मा को साध कर अलौकिक पद तक पहुँचे। वैजयंती दांते के विषय ने उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से करवायी। प्रतिभागियों ने समय चक्र, कुर्सी, प्रतियोगिता, दैव- दैव आलसी पुकारा, रसगुल्ला, माया, दुख कैसे दूर करें आदि विषयों पर भी अपने विचार रखे और कुरीतियों को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया। अध्यक्ष अमर चड्ढा ने स्वागत भाषण दिया तथा अतिथि परिचय करवाया सचिव इंदु पाराशर ने।पद्मा राजेंद्र व मंजू मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। साहित्यकार ज्योति जैन ने आगामी 14-15 मई को होने वाले अंतरराष्ट्रीय साहित्य समागम के बारे में सदस्यों को जानकारी दी। कविता अर्गल ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। शांता पारेख द्वारा आभार प्रकट किया गया।