सब की अपनी कहानी है…..

कहीं नादान,कहीं सयानी है,

कहीं रोज़ नई,कहीं पुरानी है,

सब जीते हैं किरदार अपना,

सबकी अपनी कहानी है।

कहीं नमक नीर नैनों में भरा,

कहीं तीन पहर हंसता चेहरा,

किसी मन ने चिंता ठानी है,

सब की अपनी कहानी है।

कोई हार के वार से हारा है,

कहीं तिनका भी सहारा है,

कहीं जीत की जुगत जुबानी है,

सब की अपनी कहानी है।

कहीं मन मधु मदिरा का प्याला,

कहीं बोल बोल विष की हाला,

कहीं चतुर चौकन्नी वाणी है,

सब की अपनी कहानी है।

कहीं सुख श्रृंगार सजता है,

कहीं अर्तनाद ही बजता है,

कहीं जीवन ठहरा पानी है,

सबकी अपनी कहानी है।

कहीं नादान,कहीं सयानी है,

कहीं रोज नई,कहीं पुरानी है,

अपनी ही सब ने जानी है,

सबकी अपनी कहानी है।

ऋद्धिका आचार्य।

बीकानेर।