श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ गुफा मंदिर के समीप अचानक आए सैलाब में अब तक 17 तीर्थयात्रियों की मौत की मौत हो गई है। हादसे की वजह बादल फटने को बताया जा रहा है। वहीं 40 लोग लापता हैं। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि यह घटना बादल फटने की वजह से नहीं हुई है। आईएमडी हर साल, अमरनाथ यात्रा के लिए मौसम को लेकर एक विशेष सलाह जारी करता है। शुक्रवार को आईएमडी ने येलो अलर्ट (मतलब नजर रखें) जारी किया था। अमरनाथ यात्रा वेबसाइट पर शाम 4.07 बजे तक के मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक पहलगाम और बालटाल दोनों तरफ के मार्गों के लिए ‘आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ बहुत हल्की बारिश’ की संभावना जताई गई थी, साथ में कोई चेतावनी नहीं थी।
पवित्र गुफा में स्वचालित मौसम केंद्र (एडब्ल्यूएस) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक बारिश नहीं हुई। आईएमडी के एक वैज्ञानिक ने कहा, शुक्रवार शाम 4:30 से 5:30 बजे के बीच सिर्फ 3 मिमी बारिश हुई थी। हालांकि, शाम 5:30 बजे से शाम 6:30 बजे के बीच 28 मिमी बारिश हुई। आईएमडी के मानदंड के अनुसार, यदि 1 घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक वर्षा होती है तो इसे बादल फटना कहा जाता है। फिर आखिर हुआ क्या? प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गुफा के प्रवेश द्वारा से मुश्किल से 200-300 मीटर की दूरी पर दो पहाड़ियों के बीच पानी की तेज धार अपने साथ मलबे लेकर नीचे की ओर आती दिखाई पड़ी। स्पष्ट रूप से, यह पवित्र गुफा के पीछे तेज वर्षा का परिणाम था।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम की देखभाल करने वाले सेंटर के प्रमुख सोनम लोटस ने कहा, ‘यह केवल पवित्र गुफा के ऊपर एक अत्यधिक स्थानीयकृत बादल था। इस साल की शुरुआत में भी ऐसी बारिश हुई थी। यह एक फ्लैश फ्लड नहीं थी।’ लोटस ने यह भी पुष्टि की कि, संभावना है कि गुफा की तुलना में अधिक ऊंचाई पर अत्यधिक वर्षा हुई थी। सेवानिवृत्त मौसम विज्ञानी और आईएमडी के पूर्व उत्तर भारत प्रमुख, आनंद कुमार शर्मा ने समझाया, ‘वर्षा एक अत्यधिक परिवर्तनशील पैरामीटर है, और यह विशेष रूप से अजीबोगरीब ऑरोग्राफी वाले पहाड़ों के लिए सच है। साथ ही, यात्रा मानसून के चरम मौसम में होती है। बारिश गुफा के सामने नहीं हो सकती है, लेकिन उसके ऊपर कहीं हो सकती है, जिसका असर नीचे की ओर होगा।’
मेडिकल स्टॉफ और सभी डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द-
शनिवार सुबह से एक बार फिर ऑपरेशन में तेजी लाई जा रही है। घटना में हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए जम्मू कश्मीर के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने कश्मीर घाटी में तैनात सभी सरकारी मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। घटना स्थल पर आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीमें डटी हैं। पूरी रात बवाव कार्य चला है। सुबह शनिवार को अभियान को और तेज किया गया है। बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टर और खोजी कुत्तों की भी बदद ली जा रही है। अब 16 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 40 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ के कारण पवित्र गुफा क्षेत्र के पास फंसे अधिकांश यात्रियों को पंजतरणी स्थानांतरित कर दिया गया है।आईटीबीपी ने लोअर होली गुफा से पंजतरणी तक अपने मार्ग खोलने और सुरक्षा दलों को और बढ़ाया है। अब तक करीब 15,000 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है जम्मू-कश्मीर के डॉक्टरों के साथ वहां मौजूद बीएसएफ के डॉक्टर ने मरीजों को प्राथमिक उपचार और सीपीआर दिया। 9 मरीजों का इलाज किया गया जो गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें कम ऊंचाई वाले नेलग्राथ बेस कैंप में रेस्क्यू किया गया था। सोनमर्ग के बालटाल बेस कैंप से अमरनाथ यात्रा अस्थाई रूप से स्थगित की गई है। एक श्रद्धालु ने कहा है कि हमें आज के लिए यहां टेंट में रहने के लिए कहा गया है। वहां (अमरनाथ गुफा) मौसम साफ नहीं है।
राज्यपाल प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने चार टेलीफोन नंबर जारी किये हैं जिस पर संपर्क कर लोग जानकारी ले सकते हैं। सरकार के जनसंपर्क विभाग और श्राइन बोर्ड ने ट्वीट किया कि अमरनाथ यात्रा के लिए हेल्पलाइन नंबर: एनडीआरएफ: 011-23438252, 011-23438253, कश्मीर डिविजनल हेल्पलाइन: 0194-2496240, श्राइन बोर्ड हेल्पलाइन: 0194-2313149। इसके साथ ही प्रशासन ने कहा कि उसका ध्यान अभी राहत अभियान पर है। गांदरबल जिले के डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की सीएमओ डॉ अफरोजा शाह ने बताया कि इस घटना में 45 लोगों के घायल होने और 13 के मरने की पुष्टि हुई है। सभी घायलों का बेस अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मरीजों की देखभाल के लिए 28 डॉक्टर, 98 पैरामेडिकल स्टाफ और 16 एंबुलेंस को ड्यूटी पर लगाया गया है। इसके साथ ही एसडीआरएफ की टीमें भी बचाव अभियान में लगी हुई हैं।