निर्माण कार्य मे लगे मजदुरो के जीवन को नजदीक से देखा, जब पोलियो की दवाई पिलाने नगर से बहुत दूर बिल्डिंग व बंगलो पर जाते थे।उनका एक चौकीदार भी था ।उसका परिवार गांव में ही रहता, उसका घर ईंट का होता ऊपर टीन शेड ।बंगले का गृहप्रवेश की तैयारी होने लगी,तो उसने परिवार को भी बुला लिया।रात को रतजगा हुआ।सुबह वास्तु पूजन हवन,यज्ञ की हवि से सारे दोष मिट गए ,पावनपूत धूम्र मोहाविष्ट कर गया उस चौकीदार के परिवार को, शाम को अपूर्व सज्जा पकवान की सुगंध,सजे धजे जोड़े बुके उपहार लेक़े आये।उसके परिवार को भी भरपूर खाना नाश्ता, मिठाईयां खूब दी गई।बच्चे तो बहुत ही प्रफुल्लित थे।चार दिन में घर पूरा सज गया ,सब सामान नया ही था ,रहने भी आगये विधिवत रसोई बनने लगी तो आगे गार्ड रूम में वर्दीधारी आगया।मालिक ने बहुत प्रेम से उसे बुला कर उक्त घर तोड़ कर जाने को कहा बहुत अच्छी रकम दी, पुराने घर की लोहे की अलमारी भी दी।उसकी घरवाली बोली, तुम हर बार मुझे बुलाते उनका घर बन जाता मुझे गांव धकेल देते ।तुमको कितने घर व सामान मिले ,मुझे बड़ा नही छोटा ही सही स्थायी घर परिवार कब मिलेगा।सस्ते सामान की चौकीदारी बिना वर्दी वाला करता।महंगे सामान के लिए वर्दी,टेलीफोन रजिस्टर कैमरा वाला ।वो तो शिव की तरह अनिकेत निस्पृह है।चुपचाप, चल देता जहां जेसीबी चल रही होती।उनके बच्चे न पढ़ेंगे न राशन कार्ड न मतदान।वो तो अवधूत साधु है।