विपक्ष मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा कहा- मुआवजा 4 लाख दें, नारेबाजी के बीच कार्यवाही स्थगित
भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में आज चौथे दिन जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में प्रदूषित जल से हुई मौतों का मामला उठाते हुए कहा कि करीब 35 लोगों की लापरवाही के चलते मौत हो गई। सरकार ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई कर खुद की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। जबकि इस अमानवीयता के लिए खुद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को इस्तीफा दे देना चाहिए था। इसके अलावा जो दो दो लाख रुपए मुआवजे में दिए गए है उस राशि को बढ़ाकर 4 लाख कर देना चाहिए। इस पर दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी शुरु हो गई और आसंदी के समक्ष कांग्रेस सदस्य बैठ गए। मामले को भांपते हुए अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर दोपहर दो बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थितगत कर दी।
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए ऐसी चर्चा से न्यायालय की अवमानना की स्थिति बन सकती है। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने सुझाव दिया कि सदन में बहस के बजाय संबंधित मंत्री से अलग बैठक कर चर्चा करना बेहतर होगा। पूर्व अध्यक्ष सीता शरण शर्मा ने भी कहा कि अदालत में मामला होने से सदन में चर्चा उचित नहीं।
जवाब में डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया फैलने के बाद स्थिति गंभीर हुई और 22 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की राहत दी गई। इस पर सिंघार ने मृतकों की संख्या 35 बताते हुए सभी को मुआवजा देने और मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की और एक आईएएस अधिकारी को निलंबित भी किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के राहत कार्यों का भी उल्लेख किया गया।
विवाद बढ़ने पर डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने भी सरकार का पक्ष रखा, लेकिन इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच सदन में जोरदार हंगामा जारी रहा। विधायक सचिन यादव, रजनीश सिंह, फूल सिंह बरैया, सहित तमाम सदस्य आसंदी के समक्ष बैठकर भजन करने लगे और बीच बीच में राम नाम सत्य है सरकार मस्त है के नारे लगाते रहे।
एक दूसरे पर आरोप
विधानसभा में सत्ता और विपक्ष ने एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए। विपक्ष का कहना था कि मंत्री इस्तीफा देकर संवेदना व्यक्त करें। इस पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि बाबा महाकाल में भी हादसा हुआ था उस समय क्या तत्कालीन मुख्यमत्री दिग्विजय सिंह ने इस्तीफा दिया था। तब आपकी संवेदना कहां चली गई थी। सत्ता पक्ष से प्रहलाद पटेल, नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित कई मंत्रियों ने यूनियन कार्बाइड का हवाला देते हुए कहा कि उस वक्त मामले की गंभीरता को देखते हुए चर्चा नहीं हुई थी फिर आज इस विषय पर कांग्रेस क्यों जबरियां नौटंकी कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने माना दूषित पानी से हुई 22 मौतें
विधानसभा में डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि इंदौर में 21 दिसंबर 2025 से उत्तर दिए जाने तक दूषित पानी के कारण कुल 22 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस अवधि में 459 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 4 मरीज अभी भी उपचाराधीन हैं।

