विश्व शांति के लिए कृष्ण-सुदामा जैसा मैत्री भाव अनिवार्य : पं. ब्रजकिशोर नागर

इंदौर

धरावरा धाम में सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ का विशाल भंडारे के साथ समापन ::
इंदौर । वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहाँ स्वार्थ और सत्ता का संघर्ष चरम पर है, वहाँ कृष्ण-सुदामा का पावन मैत्री भाव ही शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। मित्रता के नाम पर मोह-माया से बंधे रिश्ते स्थायी नहीं होते; आज कलयुग में मित्रता को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है। यह उद्गार प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ आचार्य पं. ब्रजकिशोर नागर ने शनिवार को व्यक्त किए।
वे धार रोड स्थित धरावरा धाम आश्रम में महंत शुकदेव दास महाराज के सानिध्य में आयोजित मानस सम्मेलन एवं भागवत ज्ञान यज्ञ के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। पं. नागर ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के मध्य उपजे तनाव का संदर्भ देते हुए कहा कि जिस दिन सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजा अपने महलों के द्वार सुदामा जैसे आम आदमी के लिए खोल देंगे, उसी दिन देश में वास्तविक प्रजातंत्र और कृष्णयुग की पुनर्स्थापना होगी।
:: भक्ति के उल्लास में थिरका पांडाल ::
कथा के अंतिम दिन कृष्ण-सुदामा मिलन प्रसंग के दौरान भक्ति का अनूठा उल्लास देखा गया। ‘अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो…’ जैसे हृदयस्पर्शी भजनों पर हजारों श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। इस अवसर पर मुख्य यजमान नानूराम चौधरी, ललित अग्रवाल, डॉ. सुरेश चोपड़ा, रेखा श्रीकांत शर्मा, सुधीर अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य जनों ने व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन किया।
:: पं. नागर का भावभीना अभिनंदन ::
आयोजन समिति द्वारा महंत शुकदेवदास महाराज के मार्गदर्शन में पं. ब्रजकिशोर नागर का क्षेत्र के 25 गाँवों के भक्तों की ओर से आत्मीय सम्मान किया गया। पं. नागर ने धरावरा धाम की महिमा का बखान करते हुए इसे साकेतवासी महंत घनश्याम दास महाराज के संकल्पों का सुफल बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि महंत शुकदेवदास महाराज की निष्ठा से इस धाम की आध्यात्मिक आभा निरंतर बढ़ती रहेगी।
:: 15 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी ::
पूर्णाहुति के पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में आसपास के 25 गाँवों से आए लगभग 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी का लाभ लिया। सेवा और समर्पण का यह क्रम मध्यरात्रि तक अनवरत चलता रहा।